11 जुलाई 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ (शुल्क) दोगुना करने के फैसले के बाद, भारतीय बैंक अब निर्यातकों के नए लोन आवेदनों की कड़ी जांच कर रहे हैं। इस जांच में खास तौर पर अमेरिका के बाजार में उनकी हिस्सेदारी और व्यापार निरंतरता के लिए उनके पास क्या योजना है, इस पर फोकस किया जा रहा है।
ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पांच बड़े बैंकों के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे अपने निर्यात-आधारित ग्राहकों, खासकर कपड़ा, रत्न और आभूषण उद्योगों से जुड़े लोगों की वित्तीय स्थिति की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं।
बैंकों के अधिकारियों ने बताया कि नए एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग प्रपोज़ल या उसके नवीनीकरण के समय अब उधारकर्ताओं से अधिक बारीकी से सवाल पूछे जा रहे हैं। कई निर्यात ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर हैं, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी जारी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक हफ्ते में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को दोगुना कर 50% तक पहुंचा देने से निर्यातक चिंता में हैं। इस फैसले का असर खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ा है, जो पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे थे। इन उद्योगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से राहत की मांग की है।
भारतीय बैंक चिंतित हैं कि यह व्यापार युद्ध कहीं फिर से बैलेंस शीट पर दबाव न बना दे, जैसा कि कुछ साल पहले देश को डूबे हुए कर्जों की समस्या से जूझना पड़ा था। इसलिए बैंक अब आंतरिक रूप से यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि किन क्लाइंट्स की आय अमेरिका से सबसे ज़्यादा जुड़ी हुई है।
कुछ निर्यातक अमेरिकी टैक्स से बचने के लिए उत्पादन को भारत से बाहर शिफ्ट करने, नए बाजारों में विस्तार करने और अमेरिका में अधिग्रहण करने की रणनीति अपना रहे हैं। हालांकि कुछ कंपनियां नुकसान सहने की स्थिति में हैं, लेकिन उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धियों से दीर्घकालिक नुकसान की आशंका है, जहां से आयात पर अमेरिका में कम टैक्स लगता है।
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि सरकार निर्यातकों से बातचीत कर रही है और “राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।” वहीं रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने ब्याज राहत, ड्यूटी ड्रॉबैक और वर्किंग कैपिटल पर ब्याज स्थगन जैसे उपायों की मांग की है।
अब तक रेटिंग एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है, लेकिन कंपनियों को डर है कि यदि रेटिंग गिरी तो कर्ज लेने की लागत बढ़ जाएगी। मुंबई स्थित क्रिएटिव गारमेंट्स प्रा. लि. के निदेशक राहुल मेहता ने कहा कि सरकार को कोविड-काल जैसी आपातकालीन नीति अपनानी चाहिए, और बैंकों को ब्याज दर कम करने का निर्देश देना चाहिए। साथ ही कच्चे माल पर आयात शुल्क हटाने की भी मांग की जा रही है।
अमेरिका-भारत व्यापार विवाद के इस दौर में, जहां टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं, वहीं बैंक और सरकार दोनों के सामने चुनौती है कि निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा कैसे दी जाए। आने वाले हफ्तों में सरकार के कदम और अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
सारांश:
ट्रम्प टैरिफ के असर से निर्यातकों के व्यापार पर खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते बैंक उन्हें लोन देने से हिचकिचा रहे हैं। बैंकों को आशंका है कि कारोबार में गिरावट से दिया गया पैसा डूब सकता है।