20 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : चुनावी साल 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजनीतिक दलों के खर्च और आय के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है. चुनाव आयोग में जमा कराई गई पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा ने इस अवधि में कुल 3,335.36 करोड़ रुपये चुनावों पर खर्च किए, जो कांग्रेस के 896.22 करोड़ रुपये के खर्च से लगभग चार गुना अधिक है. इस दौरान लोकसभा चुनाव, आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव और उपचुनाव कराए गए थे. भाजपा की कुल आय 2024-25 में 6,769.14 करोड़ रुपये रही, जिसमें से 6,124.85 करोड़ रुपये चंदे के रूप में प्राप्त हुए. पार्टी का कुल खर्च 3,774.58 करोड़ रुपये रहा, जिसके बाद उसके पास 2,994.56 करोड़ रुपये का सरप्‍लस है. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भाजपा न सिर्फ चुनावी खर्च में आगे रही, बल्कि संसाधन जुटाने में भी उसने अन्य दलों पर बड़ी बढ़त बनाई.

‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा खर्च विज्ञापनों पर किया. कुल 3,335.36 करोड़ रुपये के चुनावी खर्च में से 897.42 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च हुए. नेताओं की हवाई यात्रा और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर 583.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में 312.90 करोड़ रुपये दिए गए. इसके अलावा पार्टी कर्मचारियों पर 74.34 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें 69.07 करोड़ रुपये वेतन और 5.27 करोड़ रुपये कर्मचारी कल्याण योजनाओं पर शामिल हैं. हालांकि, वेतन मद में खर्च पिछले वर्ष की तुलना में मामूली रूप से घटा है. दिलचस्प रूप से भाजपा ने 2024-25 में पुराने अखबार बेचकर जहां मात्र 2.26 लाख रुपये कमाए, वहीं नए अखबार खरीदने पर 50.29 लाख रुपये खर्च किए. यह आंकड़ा पार्टी के प्रचार और सूचना तंत्र के विस्तार की ओर संकेत करता है.

कांग्रेस ने भी करोड़ों खर्चें, TMC को झटका

दूसरी ओर, कांग्रेस की स्थिति भाजपा की तुलना में कमजोर रही. पार्टी की कुल आय 918.28 करोड़ रुपये रही, जबकि उसका खर्च 1,111.94 करोड़ रुपये रहा. यानी कांग्रेस ने अपनी आय से अधिक खर्च किया और वित्तीय घाटे में रही. इसके मुकाबले भाजपा की आय 2023-24 के 4,340.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,769.14 करोड़ रुपये हो गई, जबकि खर्च भी 2,211.69 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,774.58 करोड़ रुपये पहुंच गया. अन्य दलों की बात करें तो ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी की चंदा राशि 646.39 करोड़ रुपये से घटकर 184.08 करोड़ रुपये रह गई, जबकि उसका कुल खर्च 227.59 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 137.58 करोड़ रुपये चुनावी खर्च शामिल था. YSR कांग्रेस पार्टी की चंदा राशि 184.11 करोड़ रुपये से घटकर 140.05 करोड़ रुपये रह गई और उसने चुनावों पर 299.92 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें स्टार प्रचारकों पर 2.14 करोड़ रुपये शामिल थे.

टीडीपी का घटा चंदा

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को मिलने वाला चंदा भी 274.65 करोड़ रुपये से घटकर 85.20 करोड़ रुपये रह गया, जबकि बीजू जनता दल (बीजेडी) की चंदा राशि 245.5 करोड़ रुपये से घटकर 60 करोड़ रुपये रह गई. हालांकि, बीजेडी ने 2024-25 में कुल 270.66 करोड़ रुपये चुनाव पर खर्च किए, जिसमें 6.02 करोड़ रुपये प्री-पोल सर्वे और 2.25 करोड़ रुपये पोस्ट पोल सर्वे पर खर्च हुए. वामपंथी दल सीपीआई (एमएल) लिबरेशन की चंदा राशि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो 94.63 लाख रुपये से बढ़कर 2.98 करोड़ रुपये हो गई. प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय भी इसके दानदाताओं में शामिल रहीं, जिन्होंने एक लाख रुपये का योगदान दिया. पार्टी ने चुनावों पर 1.69 करोड़ रुपये खर्च किए.

JDU-SP की बढ़ी आय

जनता दल (यूनाइटेड) की चंदा राशि 4.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 18.69 करोड़ रुपये हो गई, जबकि समाजवादी पार्टी की चंदा राशि 48.22 लाख रुपये से बढ़कर 93.47 लाख रुपये तक पहुंच गई. ऑडिट रिपोर्ट से साफ है कि 2024-25 के चुनावों में भाजपा ने संसाधनों और खर्च के मामले में बाकी सभी दलों पर भारी बढ़त बनाई. विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी राजनीति में बढ़ते खर्च लोकतंत्र के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही के नए सवाल खड़े कर रहे हैं.

सारांश:
चुनावों में भाजपा ने ₹3300 करोड़ खर्च किए, जबकि कांग्रेस ने ₹890 करोड़ का खर्च किया। ममता बनर्जी की TMC के चुनावी चंदे में कमी देखी गई।

Bharat Baani Bureau

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