20 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जंग, महंगाई और सुस्त ग्रोथ से जूझ रही हैं, ऐसे समय में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। एक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में भारत की GDP ग्रोथ करीब 7.4% रहने का अनुमान है। इस रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी ताकत है सरकार का कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च, सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन और धीरे-धीरे सुधरता निजी निवेश। लेकिन सवाल यही है- क्या यह रफ्तार आगे भी बनी रह पाएगी?

कैपेक्स पर बड़ा दांव: इंफ्रास्ट्रक्चर ही बनेगा ग्रोथ इंजन

बजट 2026-27 में सरकार का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 12 से 13 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स रख सकती है, जो पिछले साल से 10–15% ज्यादा हो सकता है। सड़कें, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, शहरी विकास, हाउसिंग, पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी- इन सभी सेक्टर्स में खर्च बढ़ने की संभावना है। सरकार का मकसद साफ है- नौकरियां पैदा करना, निवेश खींचना और लंबी अवधि की ग्रोथ सुनिश्चित करना।

खपत की चिंता: शहर सुस्त, गांव अब भी डगमग

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। रिपोर्ट बताती है कि शहरी खपत में सुस्ती बनी हुई है और ग्रामीण मांग अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है- कैपेक्स और कंजम्पशन के बीच सही संतुलन बनाना। बजट में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, रोजगार योजनाओं, स्किलिंग प्रोग्राम और टार्गेटेड वेलफेयर स्कीम्स के जरिए मांग को सहारा देने की कोशिश की जा सकती है।

फिस्कल डेफिसिट: बाजार की नजर सरकार के अनुशासन पर

बाजार सरकार से फिस्कल अनुशासन की उम्मीद लगाए बैठा है। रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.2–4.4% के दायरे में रखने का लक्ष्य हो सकता है। इसका सीधा असर बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों और महंगाई पर पड़ेगा। सरकार अगर इस लक्ष्य पर खरी उतरती है, तो घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।

डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन: पुरानी चुनौती, नई उम्मीद

सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती है- नॉन-टैक्स रेवेन्यू जुटाना। रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से जुटाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि बीते सालों में इस मोर्चे पर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे में बाजार सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप की उम्मीद कर रहा है।

टैक्स में राहत नहीं, लेकिन सिस्टम हो सकता है आसान

बड़े टैक्स कट की उम्मीद फिलहाल कम है। रिपोर्ट कहती है कि सरकार टैक्स दरें घटाने की बजाय टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, मुकदमेबाजी कम करने और रिफंड तेजी से देने पर फोकस कर सकती है। मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन को टार्गेटेड टैक्स इंसेंटिव मिल सकते हैं

RBI डिविडेंड: सरकार के लिए बड़ा सहारा

बजट के गणित में RBI से मिलने वाला डिविडेंड अहम भूमिका निभा सकता है। FY26 में रिकॉर्ड सरप्लस मिलने के बाद FY27 में भी सरकार को RBI से मजबूत डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। इससे सरकार को उधारी कम करने और ग्रोथ खर्च बनाए रखने में मदद मिल सकती है

स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स: असली कहानी आंकड़ों से आगे

रिपोर्ट साफ कहती है कि बाजार सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सुधारों के संकेत भी देखेगा। Ease of Doing Business, लेबर रिफॉर्म्स, लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कानूनी और रेगुलेटरी सरलीकरण। ये वो फैक्टर हैं जो लंबे समय में भारत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए और आकर्षक बना सकते हैं

सेक्टोरल तस्वीर: किसे फायदा, किसे इंतजार

रिपोर्ट के मुताबिक, बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, सीमेंट, पावर, डिफेंस, हेल्थकेयर, फार्मा, टेलीकॉम, EV, रिन्यूएबल एनर्जी और मेटल्स सेक्टर को फायदा मिल सकता है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में नीतिगत समर्थन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

सारांश:
बजट 2026 में टैक्स कटौती नहीं की गई है, लेकिन आम आदमी को कई तरह की राहतें दी गई हैं। रिपोर्ट में महंगाई, रोजगार, सब्सिडी और सुविधाओं से जुड़ी 8 बड़ी बातों का जिक्र किया गया है।

Bharat Baani Bureau

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