22 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अगर आप म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं या करने की योजना बना रहे हैं, तो बजट 2026 आपके टैक्स बोझ और रिटर्न पर असर डाल सकता है। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की टॉप संस्था एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने केंद्र सरकार से कुछ हालिया टैक्स बदलावों को वापस लेने और निवेशकों के लिए नए, अनुकूल विकल्प लाने की मांग की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। AMFI की मांग का मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि के निवेश को ज्यादा फायदेमंद, स्थिर और रिटायरमेंट के लिए अनुकूल बनाना है, ताकि खुदरा निवेशकों को लॉन्ग टर्म में बेहतर लाभ मिल सके।

1. डेट फंड के लिए इंडेक्सेशन की वापसी की मांग

यह क्यों जरूरी है: अगर आप स्थिर रिटर्न या नियमित आय के लिए डेट म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो बजट 2024 के बाद से टैक्स के कारण आपके पोस्ट-टैक्स रिटर्न पर असर पड़ा है।

AMFI ने लंबी अवधि के डेट फंड्स के लिए इंडेक्सेशन लाभ दोबारा लागू करने की मांग की है। इंडेक्सेशन में महंगाई को जोड़कर खरीद मूल्य तय किया जाता है, जिसके बाद कैपिटल गेन टैक्स लगता है। इंडेक्सेशन न होने पर महंगाई के कारण बढ़ी रकम पर भी टैक्स देना पड़ता है, जिससे वास्तविक रिटर्न घट जाता है।

निवेशकों के लिए इसका मतलब:

  • डेट फंड से महंगाई के हिसाब से बेहतर रिटर्न मिलेगा।
  • अन्य लंबी अवधि के निवेश विकल्पों के मुकाबले टैक्स व्यवस्था अधिक न्यायसंगत होगी।
  • रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए डेट फंड आकर्षक बनेंगे।

AMFI का कहना है कि इससे घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आएगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

2. डेट निवेशकों के लिए ELSS जैसा नया टैक्स सेविंग विकल्प

यह क्यों जरूरी है: फिलहाल टैक्स बचत के ज्यादातर फायदे इक्विटी निवेशकों को ELSS फंड्स के जरिए मिलते हैं। वहीं, कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों के लिए ऐसा कोई समान विकल्प मौजूद नहीं है।

AMFI ने डेट लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (DLSS) का प्रस्ताव रखा है, जो ELSS की तरह एक टैक्स बचत वाला डेट म्युचुअल फंड होगा।

निवेशकों के लिए इसका मतलब:

  • अगर आप इक्विटी की तुलना में कम उतार-चढ़ाव चाहते हैं, तो यह एक टैक्स के लिहाज से एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • सुरक्षा, रिटर्न और टैक्स प्लानिंग के बीच बेहतर संतुलन मिलेगा।
  • जोखिम से बचने वाले या रिटायरमेंट के करीब निवेशकों के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे।

3. इक्विटी कैपिटल गेन पर टैक्स-फ्री सीमा बढ़ाने की मांग

यह क्यों जरूरी है: फिलहाल इक्विटी निवेश से होने वाले सालाना 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर टैक्स देना पड़ता है।AMFI ने इस टैक्स-फ्री सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग की है, जिससे छोटे और लंबी अवधि के निवेशकों को राहत मिल सके।

निवेशकों के लिए इसका मतलब:

  • SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करने वालों पर टैक्स का बोझ कम होगा।
  • बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश बनाए रखने की प्रेरणा मिलेगी।
  • अनुशासित और लंबे समय तक निवेश करने वाले निवेशकों को बेहतर नेट रिटर्न मिलेगा।

4. 5 साल से ज्यादा होल्ड किए गए इक्विटी फंड पर जीरो टैक्स की मांग

यह क्यों जरूरी है: लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन के लिए बार-बार खरीद–बिक्री नहीं, बल्कि निवेश बनाए रखना जरूरी होता है।

AMFI ने सुझाव दिया है कि जो म्युचुअल फंड यूनिट्स 5 साल से ज्यादा समय तक होल्ड की जाएं, उन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स पूरी तरह खत्म किया जाए।

5. NPS जैसे टैक्स फायदे वाले पेंशन-स्टाइल म्युचुअल फंड

यह क्यों जरूरी है: रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए निवेशकों को सिर्फ एक ही ढांचे में निवेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

AMFI चाहती है कि म्युचुअल फंड्स को ऐसे पेंशन-फोक्स्ड स्कीम लॉन्च करने की अनुमति मिले, जिनमें नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे टैक्स लाभ मिलें।

निवेशकों के लिए इसका मतलब:

  • रिटायरमेंट प्लानिंग में ज्यादा लचीलापन मिलेगा।
  • म्युचुअल फंड की पारदर्शिता के साथ प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट का फायदा मिलेगा।
  • उन निवेशकों के लिए एक विकल्प बनेगा, जिन्हें NPS बहुत ज्यादा सख्त या सीमित लगता है।

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने सरकार से आगामी बजट 2026-27 में डेट म्युचुअल फंड्स के लिए इंडेक्सेशन लाभ दोबारा लागू करने और म्युचुअल फंड्स को NPS जैसे टैक्स फायदे वाली पेंशन-फोक्स्ड स्कीमें पेश करने की अनुमति देने की मांग की है।

सारांश:
बजट 2026 से पहले म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। AMFI (Association of Mutual Funds in India) ने सरकार के सामने 5 अहम मांगें रखी हैं, जिनका मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और निवेश को बढ़ावा देना है। इनमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में कटौती, इक्विटी और डेट फंड्स के टैक्स नियमों में समानता, इंडेक्सेशन बेनिफिट की वापसी, डिविडेंड टैक्स में सुधार और छोटे निवेशकों को टैक्स राहत देने जैसी मांगें शामिल हैं। अगर ये प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो म्यूचुअल फंड निवेश और ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

Bharat Baani Bureau

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