तेहरान 30 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. इस बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले के लिए एक गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार कर ली है, जिसमें यूरोप, इजरायल और कुछ अरब देशों की भागीदारी बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने यूके, फ्रांस, इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की एक गुप्त लिस्ट बनाई है. अरब देशों में UAE और जॉर्डन के समर्थन की संभावना जताई जा रही है, जबकि सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र इस हमले के खिलाफ हैं.

किन ठिकानों पर कर सकता है हमला?

इजरायली अखबार इजरायल हायोम के मुताबिक ट्रंप ने अपनी टीम को ‘डिसाइसिव मिलिट्री प्लान’ तैयार करने को कहा है. अमेरिका का दावा है कि यह योजना प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने और ईरानी शासन को कमजोर करने के लिए है. लीक रिपोर्ट्स के आधार पर संभावित टारगेट तीन हिस्सों में बंटे हैं. पहला, न्यूक्लियर साइट्स जैसे फोर्डो, नटांज और इस्फाहान फिर से निशाने पर हो सकते हैं. दूसरा, टार्गेट सैन्य नेतृत्व यानी ईरान के टॉप कमांडर्स, खासकर IRGC से जुड़े अधिकारी और आंतरिक सुरक्षा बल शामिल हो सकते हैं. तीसरा, रणनीतिक ठिकाने हैं जो बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रियां, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य बेस हैं. इसके अलावा साइबर अटैक और कोवर्ट ऑपरेशंस भी विकल्प के तौर पर रखे गए हैं.

अमेरिका के हमले का कैसे जवाब देगा ईरान?

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगियों ने उस पर सीधा हमला किया, तो जवाब सिर्फ एक मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा. ईरानी रणनीति सालों से इस सोच पर टिकी रही है कि वह अमेरिका जैसी बड़ी सैन्य ताकत को सीधे युद्ध में मात नहीं दे सकता, लेकिन उसे इतना नुकसान जरूर पहुंचा सकता है कि पूरा इलाका और वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाए.

अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमला

ईरान का सबसे सीधा और तात्कालिक जवाब होगा मिसाइल और ड्रोन अटैक. मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 30 से 40 हजार सैनिक अलग-अलग देशों में तैनात हैं. कतर, इराक, बहरीन, कुवैत और यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान की रेंज में आते हैं.

ईरान पहले भी ऐसा कर चुका है. जब 2025 में अमेरिका ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब ईरान ने कतर में मौजूद अल उदेद एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं. यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा एयर बेस है.

ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन हैं. इनमें शॉर्ट और मीडियम रेंज मिसाइलें शामिल हैं, जो इजरायल तक को निशाना बना सकती हैं. इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत है, लेकिन 2025 में ईरान के हमलों ने दिखा दिया कि सब कुछ रोका नहीं जा सकता.

इजरायल पर सीधा हमला

आपने उस राजा की कहानी सुनी होगी, जिसकी जान तोते में थी. मिडिल ईस्ट में अमेरिका को सीधे दर्द देने का सबसे बड़ा रास्ता इजरायल है. ईरान इजरायल को अमेरिका का सबसे करीबी सैन्य सहयोगी मानता है. इसलिए किसी भी बड़े हमले की स्थिति में इजरायल पहला बड़ा निशाना हो सकता है. यही कारण है कि तनाव के बीच इजरायल में मीटिंग हो रही है. ईरान खुद या अपने सहयोगियों के जरिए इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर सकता है. ईरान का मानना है कि अगर इजरायल को भारी नुकसान पहुंचता है, तो अमेरिका पर भी राजनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ेगा. यही वजह है कि ईरानी अधिकारी बार-बार कहते हैं कि हमला हुआ तो जवाब ‘इजरायल के दिल तक’ जाएगा.

प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए पूरे क्षेत्र में तबाही

ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके सहयोगी सशस्त्र संगठन हैं. इनमें लेबनान का हिजबुल्लाह, यमन के हूती और इराक की ईरान समर्थित मिलिशिया शामिल हैं. ये ग्रुप्स सीधे अमेरिका से नहीं, बल्कि उसके हितों पर वार करते हैं.

  1. हूती लाल सागर में अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर हमला कर सकते हैं.
  2. इराक में अमेरिकी सैन्य काफिलों और बेस को निशाना बनाया जा सकता है.
  3. हिजबुल्लाह उत्तरी इजरायल में बड़े पैमाने पर रॉकेट हमले कर सकता है.
  4. इस रणनीति का फायदा यह है कि ईरान सीधे युद्ध में उतरे बिना पूरे इलाके को अस्थिर कर सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव

ईरान का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक जवाब होगा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को बाधित करना. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में गैस गुजरती है. ईरान कई बार कह चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह इस रास्ते को बंद कर सकता है. इसके लिए वह समुद्री बारूदी सुरंगें, तेज रफ्तार नावें, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है.

अगर होर्मुज में जहाज फंसते हैं या सप्लाई रुकती है, तो असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. पूरी दुनिया में तेल की कीमतें अचानक बहुत ऊपर चली जाएंगी. एशिया, यूरोप और अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी. वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ जा सकती है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ईरान का ‘लास्ट ऑप्शन’ होगा, क्योंकि इससे खुद ईरान और उसके पड़ोसी देशों को भी नुकसान होगा. लेकिन अगर उसे लगे कि शासन ही खतरे में है, तो वह यह कदम उठा सकता है.

सारांश:
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान पर कई देश मिलकर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के संभावित हमले की स्थिति में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर जवाबी रणनीति तैयार कर रहे हैं। इसमें क्षेत्रीय सहयोग, मिसाइल क्षमता और सहयोगी देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

Bharat Baani Bureau

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