09 फ़रवरी2026 (भारत बानी ब्यूरो) : पिछले कुछ सालों में सस्पेंस-थ्रिलर और क्राइम जॉनर की फिल्मों और सीरीज का क्रेज तेजी से बढ़ा है, यही वजह है कि अब ज्यादातर मेकर्स इस जॉनर पर फोकस कर रहे हैं। 11 साल पहले जाने-माने डायरेक्टर सुजॉय घोष भी इसी फॉर्मूले पर बेस्ड एक फिल्म लेकर आए थे, जिसकी कहानी पौराणिक कथाओं से प्रेरित थी और खास बात तो ये है कि ये सिर्फ 14 मिनट की है। 14 मिनट की इस शॉर्ट फिल्म में सस्पेंस से लेकर थ्रिलर तक, हर तरह का फ्लेवर मौजूद है, जो लगातार दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखता है और क्लाइमैक्स तो इतना शानदार है कि इसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए।
पौराणिक कथा से प्रेरित है फिल्म
सुजॉय घोष के निर्देशन में बनी ये फिल्म ‘अहल्या’ है, जो यूट्यूब पर मौजूद है। जुलाई 2015 में आई अहल्या एक शॉर्ट फिल्म है, जिसे काफी पसंद किया गया था। फिल्म रामायण की पौराणिक कथा और पात्र पर आधारित है, जिसे यूट्यूब पर 22 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। अहिल्या के पौराणिक किरदार के आधुनिक रूपांतरण वाली इस फिल्म में नारीवाद का दृष्टिकोण भी शामिल किया गया था, जो इसकी कहानी में जान फूंक देती है। फिल्म में राधिका आप्टे ‘अहल्या’ के किरदार में नजर आई थीं और इसमें उनके साथ सौमित्र चटर्जी, तोता रॉय चौधरी, आयुष्मान मित्रा और ध्रुव लाल जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
शानदार है फिल्म की कहानी
इस फिल्म की कहानी अहल्या और उसके पति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हर उस शख्स को सजा देना चाहते हैं जो उसे छूना चाहता है या उसके करीब आना चाहता है। फिल्म की कहानी इंद्र नाम के पुलिस अफसर के साथ शुरू होती है, जो एक बूढ़े आर्टिस्ट गौतम के घर पहुंचता है। इंद्र को अर्जुन नाम के एक शख्स की तलाश है, जो लापता है। जैसे ही इंद्र, गौतम के घर पहुंचता है उसकी पत्नी अहल्या दरवाजा खोलती है। इंस्पेक्टर जैसे ही गौतम की खूबसूरत पत्नी को देखता है और उस पर मोहित हो जाता है।
गौतम और अहल्या का रहस्य
इंस्पेक्टर को गौतम के घर पर कुछ मंटलपीस और डॉल्स दिखाई देते हैं जिनमें से एक हूबहू अर्जुन जैसा दिखता है। इंस्पेक्टर इंद्र अपनी जेब से फोटो निकालता है और अर्जुन को लेकर सवाल पूछने लगता है तो अहल्या घर के ऊपर कमरे में चली जाती है। इसी के बाद फिल्म के सीन में एक जादुई पत्थर भी दिखाई देता है। गौतम, इंद्र से इस पत्थर के बारे में बताता है और कहता है कि इसे जो भी छूता है, वो वही बन जाता है जो वो चाहता है। इंस्पेक्टर को उसकी बात पर भरोसा नहीं होता तो गौतम उसे ये पत्थर छूने को कहता है। इसके बाद इंस्पेक्टर,अहल्या के पीछे ऊपर जाता है और जब आईने में खुद को देखता है तो उसे गौतम का चेहरा नजर आता है और अहल्या को छूते ही खुद भी एक मूर्ति में तब्दील हो जाता है
सारांश:
पौराणिक कथा पर आधारित यह शॉर्ट फिल्म दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है। इसकी तेज़ कहानी और दमदार प्रस्तुति इतनी रोमांचक है कि क्लाइमेक्स में दर्शकों की धड़कनें बढ़ जाती हैं।
