16 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : देश की थोक मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई और ये जनवरी में बढ़कर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य चीजों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में मासिक आधार पर हुई बढ़ोतरी ने थोक मुद्रास्फीति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में ये जानकारी मिली। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर पिछले साल जनवरी में 2.51 प्रतिशत थी, जबकि दिसंबर 2025 में ये 0.83 प्रतिशत रही थी। 

जनवरी में 1.55 प्रतिशत रही खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर

उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा, ”जनवरी 2026 में थोक महंगाई दर बढ़ने की मुख्य वजह मूल धातुओं के विनिर्माण, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य चीजों, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी रही।” थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 1.55 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में इसमें 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। सब्जियों के मामले में जनवरी में महंगाई दर 6.78 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में इसमें 3.50 प्रतिशत की गिरावट आई थी। विनिर्मित उत्पादों में थोक महंगाई जनवरी में बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर में 1.82 प्रतिशत थी।

गैर-खाद्य उत्पादों की श्रेणी में 7.58 प्रतिशत पहुंची थोक महंगाई दर

गैर-खाद्य उत्पादों की श्रेणी में महंगाई जनवरी में तेज उछाल के साथ 7.58 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि दिसंबर में ये 2.95 प्रतिशत थी। ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में महंगाई दर में गिरावट जारी रही। ये जनवरी में 4.01 प्रतिशत रही, जो दिसंबर में 2.31 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 2.75 प्रतिशत हो गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों के निर्धारण के लिए खुदरा मुद्रास्फीति को आधार बनाता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अभी तक रेपो रेट में 1.25 प्रतिशत की कटौती है, जो अब 5.25 प्रतिशत है। 

सारांश:
जनवरी में थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index – WPI) लगातार तीसरे महीने बढ़कर 1.81% पर पहुंच गई है। उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे कच्चे माल और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी प्रमुख कारण हैं। खाद्य पदार्थों, ईंधन और खनिज वस्तुओं की कीमतों में उछाल ने भी थोक महंगाई दर को प्रभावित किया। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव डाल सकता है।

Bharat Baani Bureau

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