17 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में बड़ी संख्या में फैटी लिवर के मरीज बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय भी फैटी लिवर को लेकर चिंता जता चुका है। खासतौर से महानगरों में फैटी लिवर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। नॉन-एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। जिसका बड़ा कारण अनियमित जीवनशैली, फास्ट फूड, तेल-मसालेदार खाना और शराब का ज्यादा सेवन माना जाता है। भारत में हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो फैटी लिवर न केवल लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य जटिलताओं को भी जन्म देती है। सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि अब तक फैटी लिवर का कोई प्रभावी इलाज या दवा मौजूद नहीं थी, जिससे लोगों को केवल जीवनशैली में बदलाव और व्यायाम पर निर्भर रहना पड़ता था।
फैटी लिवर के लिए IIT कानपुर ने बनाया खास स्प्रे
लेकिन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने इस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार और उनकी टीम ने एक इनोवेटिव स्प्रे-आधारित थेरेपी विकसित की है, जो फैटी लीवर और आंत संबंधी बीमारियों के इलाज में क्रांति ला सकती है। यह स्प्रे Regenerative Medicine की श्रेणी में आता है और लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करने में सक्षम बताया जा रहा है।
फैटी लिवर पर कैसे काम करेगी स्प्रे दवा
प्रोफेसर अशोक कुमार ने बताया कि यह स्प्रे स्वस्थ कोशिकाओं से प्राप्त एक्सोजोम्स (exosomes) को विशेष पॉलिमर सॉल्यूशन में मिलाकर तैयार किया जाता है। लेप्रोस्कोपिक (मिनिमली इनवेसिव) विधि से लिवर में स्प्रे करने पर यह तरल रूप में इंजेक्ट होता है, लेकिन शरीर के अंदर पहुंचते ही यह जैल (gel) में बदल जाता है। यह जैल क्षतिग्रस्त लिवर सेल्स को रिपेयर करता है, फैट जमा होने की प्रक्रिया को रोकता है और लिवर को नए जैसा स्वस्थ बनाने में मदद करता है। आपको बता दें कि अभी ये रिसर्च शुरुआती तौर पर पहले चूहों पर परीक्षण के रूप में किया गया, जहां स्प्रे के इस्तेमाल से फैटी लिवर पूरी तरह सामान्य हो गया यहां तक कि व्यायाम से मिलने वाले फायदों से कहीं अधिक स्प्रे प्रभावी साबित हुआ।
फैटी लिवर खत्म करने की दवा होगी असरदार
टीम ने दावा किया कि स्प्रे का असर एक हफ्ते में दिखना शुरू हो जाता है और 2-3 महीनों में लिवर पूरी तरह रिकवर हो सकता है। यह थेरेपी न केवल फैटी लीवर, बल्कि आंत की सूजन संबंधी बीमारियों (जैसे IBD) के लिए भी विकसित की गई है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल्स की अनुमति दे दी है। ट्रायल्स एक-दो साल में पूरे होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह उत्पाद बाजार में उपलब्ध हो सकेगा।
फैटी लिवर स्प्रे की कितनी होगी कीमत
इस रिसर्च में शामिल प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार, यह स्प्रे प्राकृतिक पॉलिमर से बना है, जो भारत में ही उत्पादित होता है, इसलिए इसकी लागत काफी कम रहेगी और आम मरीज भी इसे आसानी से अफोर्ड कर पाएंगे। अभी कीमत तय नहीं हुई है, लेकिन इसे सस्ता और सुलभ बनाने पर जोर है। यह खोज लिवर रिजनरेशन और मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट के क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाती है।
अगर ये स्प्रे ह्यूमन ट्रायल के दौरान सफल रहा तो उन लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण होगा, जो फैटी लीवर से जूझ रहे हैं। अगर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे तो यह थेरेपी न केवल फैटी लीवर, बल्कि अन्य अंगों की रिजनरेटिव दवाओं के लिए भी आधार बन सकती है।
सारांश:
IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने फैटी लिवर का इलाज करने के लिए एक स्प्रे विकसित किया है। यह स्प्रे लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को निकालने में मदद करता है और कुछ ही दिनों में असर दिखा सकता है। शोध से मरीजों के जीवन में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।
