11 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : दही में थोड़ा पानी मिलाएं, हल्का सा मथें और देसी ड्रिंक छाछ तैयार हो गई। छाछ सिर्फ स्वाद नहीं देती बल्कि ये सेहत के लिए एक जबरदस्त टॉनिक है। छाछ में पुदीना मिलाने से पेट को ठंडक, परफेक्ट पाचन और गर्मी में ब्लोटिंग कम होती है। वहीं, छाछ में धनिया की चटनी डालने से इसका टेस्ट भी बढ़ेगा और भूख भी खुलेगी। अगर आप छाछ में भुना जीरा और काला नमक डालते हैं, तो गैस, सुस्ती और पेट में गड़बड़ी से राहत मिल सकती है।
क्या कहता है आयुर्वेद- गुड़ के साथ भी छाछ का सेवन किया जा सकता है। आयुर्वेद में इस तरह से छाछ का सेवन करना पाचन और ताकत, दोनों के लिहाज से अच्छा माना जाता है। हालांकि, आपको क्वॉन्टिटी बैलेंस का ध्यान रखना चाहिए। जैसे-जैसे गर्मी दस्तक देती है, छाछ सिर्फ ठंडक देने वाली ड्रिंक नहीं रह जाती, बल्कि शरीर की ऐसी जरूरत बन जाती है, जो पानी की कमी, पाचन की गड़बड़ी, दोनों पर एक साथ काम करती है।
दूर होगी न्यूट्रिशन की कमी- देश में बहुत से लोगों की बॉडी में जरूरी पोषक तत्वों की कमी रह जाती है। विटामिन बी-12 और विटामिन डी की कमी को शुरुआत में लोग मामूली कमजोरी समझकर टाल देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये थकान, चक्कर, सुस्ती, ध्यान कम लगना, मूड खराब रहना, भूलने की आदत और नसों की कमजोरी की वजह बन जाती है। छाछ-दही न्यूट्रिशन की कमी को दूर करने में कारगर साबित हो सकती है।
गौर करने वाली बात- अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो दही-छाछ आपके लिए काफी ज्यादा जरूरी हो जाती है। छाछ कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन इसे रोजमर्रा डाइट में शामिल करना समझदारी है। पोषण के लिए हर रोज छाछ का सेवन करना शुरू कर दीजिए। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए लिमिट में रहकर ही छाछ का सेवन करना चाहिए वरना आपकी सेहत पर पॉजिटिव की जगह नेगेटिव असर भी पड़ सकता है।
सारांश:
मिडिल ईस्ट में संघर्ष और हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ गई है। यह बढ़ता संघर्ष स्थानीय नागरिकों के जीवन पर गंभीर असर डाल रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक समाधान की तलाश में है।
