12 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट में संभावित रुकावटों का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा। इसका प्रभाव धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही प्रभावित होती है, तो खाड़ी देशों में दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे हालात में खाड़ी देशों के सुपरमार्केट और घरों के रेफ्रिजरेटर खाली होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

मध्य पूर्व दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल है जो डेयरी उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में इस क्षेत्र ने करीब 13 लाख टन डेयरी उत्पादों का आयात किया, जिसकी कुल कीमत लगभग 4.2 अरब डॉलर रही। यह आंकड़ा बताता है कि इस क्षेत्र की खाद्य आपूर्ति काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर टिकी हुई है।

कौन-से देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं?

खाड़ी क्षेत्र के कई देश डेयरी उत्पादों के बड़े आयातक हैं। इनमें सऊदी अरब सबसे आगे है, जो हर साल लगभग 2.1 अरब डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात करता है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) करीब 1.5 अरब डॉलर का आयात करता है। इसके अलावा इराक, कुवैत, ओमान, बहरीन और कतर भी बड़ी मात्रा में दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की खरीद करते हैं। हालांकि ईरान खुद डेयरी का बड़ा आयातक नहीं है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति खाड़ी देशों के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह समुद्री मार्ग उनके लिए दुनिया से जुड़ने का मुख्य रास्ता है।

यूएई बना सबसे बड़ा डेयरी बाजार

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों ने अकेले 2024 में करीब 2.7 अरब डॉलर के डेयरी उत्पादों का आयात किया। इसमें लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ यूएई का रहा, जिससे यह पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा डेयरी बाजार बन गया है।

इन डेयरी उत्पादों पर सबसे ज्यादा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार अगर समुद्री रास्तों में रुकावट आती है, तो होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क की सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है। ये तीनों उत्पाद मिलकर मध्य पूर्व के कुल डेयरी आयात का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

लंबा रास्ता बढ़ा सकता है लागत

अगर होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही रुकती है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ सकता है। इससे न सिर्फ ट्रांसपोर्ट में ज्यादा समय लगेगा बल्कि मालभाड़ा लागत भी काफी बढ़ जाएगी।

सारांश:
वर्तमान युद्ध का असर अब आम किचन तक पहुंच गया है। सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि दूध और पनीर जैसी डेयरी उत्पादों की सप्लाई भी संकट में है। खाड़ी देशों के रेफ्रिजरेटर खाली होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है।

Bharat Baani Bureau

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