20 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। देश के कई हिस्सों में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई उपभोक्ता बताते हैं कि उन्हें सिलेंडर मिलने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ रहा है, जिससे घरेलू जीवन और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।
इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में पैदा हुआ संकट है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। हाल के संघर्ष के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा सप्लाई चेन में बाधा आई है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में उपयोग होने वाले एलपीजी का लगभग 60 प्रतिशत आयात किया जाता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर आता है। ऐसे में यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर देश की गैस सप्लाई पर पड़ता है।
देश के कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि सिलेंडर बुक करने के बाद उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई परिवारों को वैकल्पिक उपाय अपनाने पड़ रहे हैं, जैसे इलेक्ट्रिक कुकर का उपयोग या लकड़ी और कोयले से खाना बनाना।
इस संकट का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। छोटे होटल, ढाबे और रेस्तरां भी एलपीजी की कमी से जूझ रहे हैं। कई जगहों पर खाने के कारोबारियों ने मेन्यू सीमित कर दिया है या काम के घंटे कम कर दिए हैं। कुछ उद्योगों में उत्पादन भी प्रभावित होने लगा है क्योंकि गैस कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी ईंधन है।
सरकार और ऊर्जा कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि आपूर्ति में कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके। साथ ही घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के लिए व्यावसायिक उपयोग में कटौती जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास सीमित एलपीजी भंडार है, जो कुछ हफ्तों की मांग को पूरा कर सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो देश में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
इस संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को भी उजागर किया है। भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि घरेलू उत्पादन सीमित है। ऐसे में देश को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और अन्य देशों से आयात के विकल्प भी भविष्य में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फिलहाल सरकार और ऊर्जा कंपनियां स्थिति को संभालने के प्रयास कर रही हैं और उम्मीद है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो गैस सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है।
लेकिन मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं किस तरह सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं। भारत के कई घरों में गैस सिलेंडर का इंतजार इस वैश्विक संकट का सबसे स्पष्ट उदाहरण बन गया है।
Summary
ईरान संघर्ष और हॉर्मुज़ संकट के कारण भारत की एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है। कई शहरों में सिलेंडर डिलीवरी में देरी हो रही है और उपभोक्ताओं को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
