24 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलों की कई लहरें (waves of missiles) दागने की पुष्टि की है, जबकि साथ ही उसने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ “सकारात्मक बातचीत” होने की बात कही थी।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों के बाद इजरायल के कई हिस्सों में एयर रेड सायरन बज उठे और लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। इजरायली रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें रक्षा कवच को भेदने में सफल रहीं, जिससे उत्तरी इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचा।
हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हमले में बड़े पैमाने पर जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने आम नागरिकों के बीच डर का माहौल बना दिया है। लोग बार-बार बंकरों और सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब Donald Trump ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच “बहुत अच्छी” और “उत्पादक” बातचीत हो रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि इन वार्ताओं के चलते संभावित सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है।
लेकिन ईरान ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी नेतृत्व और सरकारी मीडिया ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने ट्रंप के बयानों को “फेक न्यूज़” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह बयान अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर तेल की कीमतों को प्रभावित करने के लिए दिया गया है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ ने भी कहा कि किसी भी तरह की बातचीत की खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने अमेरिका पर “मनोवैज्ञानिक युद्ध” चलाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के दावे वास्तविक स्थिति को छुपाने की कोशिश हैं।
इस बीच, संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है और ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों देशों के बीच यह टकराव अब नियमित मिसाइल और हवाई हमलों में बदल चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई स्पष्ट कूटनीतिक संवाद नहीं दिख रहा। जहां अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, वहीं ईरान लगातार इनकार कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि या तो बातचीत बेहद सीमित स्तर पर हो रही है या फिर वास्तव में कोई औपचारिक वार्ता नहीं है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान, ओमान और अन्य मध्यस्थ देशों के जरिए अप्रत्यक्ष संपर्क की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि इन प्रयासों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार तनाव कम करने की कोशिश में लगा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। खासकर तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ट्रंप के बयान के बाद कुछ समय के लिए बाजार में स्थिरता आई थी, लेकिन ईरान के इनकार के बाद फिर से अनिश्चितता बढ़ गई है।
इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और यहां किसी भी तरह की बाधा से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मानवीय दृष्टिकोण से भी स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है। इजरायल में नागरिक लगातार हमलों के खतरे में जी रहे हैं, जबकि ईरान में भी जवाबी हमलों का डर बना हुआ है। दोनों देशों में आम जनता पर इस संघर्ष का भारी मानसिक और सामाजिक प्रभाव पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएं युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की मांग कर रही हैं, लेकिन फिलहाल जमीनी हालात में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है।
कुल मिलाकर, ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइलों की नई लहर भेजना और साथ ही ट्रंप के बातचीत वाले दावे को खारिज करना यह दर्शाता है कि स्थिति अभी और जटिल होने वाली है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या यह संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।
Summary
ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले तेज किए और ट्रंप के बातचीत दावे को खारिज किया। बढ़ते तनाव से मध्य-पूर्व में युद्ध और क्षेत्रीय संकट गहराता जा रहा है।
