30 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मध्य पूर्व में जारी Iran युद्ध के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ती जा रही है और इसका असर अब एशियाई शेयर बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हफ्ते की शुरुआत में एशियाई बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण तेल कीमतों में भारी उछाल और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 4.5% तक गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% से अधिक लुढ़क गया। हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और चीन के बाजारों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे पूरे एशियाई क्षेत्र में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है। Brent crude की कीमत $115 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो युद्ध से पहले लगभग $70 के आसपास थी। यह उछाल वैश्विक सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है, खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर जोखिम बढ़ने के कारण।

विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएं तेल आयात पर काफी निर्भर हैं, इसलिए कीमतों में यह तेजी उनके लिए बड़ा झटका है। इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

एशियाई बाजारों की गिरावट का एक और बड़ा कारण Wall Street में पिछले हफ्ते आई कमजोरी है। अमेरिकी बाजारों में लगातार गिरावट का सिलसिला देखने को मिला, जहां S&P 500, Dow Jones और Nasdaq सभी प्रमुख इंडेक्स नीचे बंद हुए।

Wall Street में आई इस गिरावट का सीधा असर एशियाई निवेशकों की भावना पर पड़ा है। आमतौर पर अमेरिकी बाजारों का ट्रेंड एशिया के लिए संकेतक होता है, और वहां की कमजोरी यहां बिकवाली को बढ़ावा देती है।

इसके अलावा, निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान भी कम हो गया है। मौजूदा हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जा रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजारों में दबाव बढ़ रहा है।

भारत समेत अन्य उभरते बाजार भी इस गिरावट से अछूते नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय बाजार भी इस महीने अपने सबसे खराब प्रदर्शन की ओर बढ़ रहे हैं, जहां विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली देखी गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। खासकर ऊर्जा, एयरलाइंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बाजारों में यह गिरावट एक “रिएक्शनरी मूव” भी हो सकती है और अगर कूटनीतिक समाधान निकलता है, तो तेजी से रिकवरी भी संभव है।

फिलहाल, निवेशकों की नजर दो चीजों पर टिकी हुई है—पहली, युद्ध की दिशा और दूसरी, तेल कीमतों का रुख। जब तक इन दोनों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट और तेल कीमतों में उछाल यह संकेत देते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर Iran युद्ध का असर गहराता जा रहा है और निवेशकों के लिए अनिश्चितता का दौर अभी जारी रह सकता है।

सारांश:

ईरान युद्ध के चलते तेल कीमतों में उछाल से एशियाई शेयर बाजार गिरे, वॉल स्ट्रीट की कमजोरी का असर दिखा, निवेशकों में अनिश्चितता और जोखिम से बचने का रुझान बढ़ा।

Bharat Baani Bureau

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