31 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ने की आशंका जताई जा रही है। Ernst & Young (EY) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत की वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की GDP वृद्धि दर में लगभग 1 प्रतिशत अंक की गिरावट आ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है और FY27 के लिए लगभग 7% की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था। लेकिन वेस्ट एशिया में जारी अस्थिरता इस अनुमान को प्रभावित कर सकती है, जिससे विकास दर घटकर करीब 6% के आसपास आ सकती है।

इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें से अधिकांश तेल वेस्ट एशिया क्षेत्र से आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों को बढ़ाता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ जाता है और आर्थिक दबाव बढ़ता है।

EY की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस संघर्ष के कारण महंगाई (inflation) भी बढ़ सकती है। अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई में लगभग 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

महंगाई बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। जब ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ती हैं, तो लोगों की क्रय शक्ति कम हो जाती है। इससे खपत (consumption) घटती है, जो भारत जैसी मांग-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक संकेत है।

इसके अलावा, वेस्ट एशिया संघर्ष से सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। तेल और गैस के अलावा उर्वरक, केमिकल्स और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा आ सकती है, जिससे कई उद्योगों की लागत बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि टेक्सटाइल, केमिकल्स, उर्वरक, सीमेंट और टायर जैसे रोजगार-प्रधान सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

अगर इन सेक्टरों में उत्पादन घटता है या लागत बढ़ती है, तो इसका असर रोजगार और आय पर भी पड़ सकता है। इससे कुल मांग में गिरावट आ सकती है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।

भारत की एक और कमजोरी उसकी आयात पर निर्भरता है। देश लगभग 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वह वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है।

इस स्थिति का असर चालू खाता घाटे (current account deficit) पर भी पड़ सकता है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ेगा और इससे रुपये पर दबाव आ सकता है। मुद्रा कमजोर होने से आयात और महंगा हो जाता है, जिससे एक नकारात्मक चक्र बन सकता है।

सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो Reserve Bank of India (RBI) को ब्याज दरों को लेकर सतर्क रहना पड़ेगा। वहीं, सरकार को भी आर्थिक राहत उपायों पर विचार करना पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की घरेलू मांग और सरकारी निवेश कुछ हद तक इस झटके को संभाल सकते हैं। लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है, तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, Ernst & Young की यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वेस्ट एशिया का यह संकट कितनी जल्दी खत्म होता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार कितनी तेजी से स्थिर होते हैं।

Summary

EY रिपोर्ट के अनुसार वेस्ट एशिया संघर्ष जारी रहने पर भारत की FY27 GDP ग्रोथ में 1% तक गिरावट और महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

Bharat Baani Bureau

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