अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में हाल ही में हल्की तेजी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद मार्च 2026 सोने के लिए 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब महीनों में से एक साबित हुआ है। निवेशकों के लिए यह स्थिति असमंजस भरी बनी हुई है, क्योंकि पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने ने इस बार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्पॉट गोल्ड की कीमतों में हाल के सत्र में लगभग 3% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमतें करीब 4,650 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गईं। हालांकि, पूरे महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोना लगभग 11–14% तक गिर चुका है, जो अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम कारण है बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें। आमतौर पर जब वैश्विक संकट होता है, तो निवेशक सोने में निवेश बढ़ाते हैं, जिससे इसकी कीमत बढ़ती है। लेकिन इस बार स्थिति अलग रही है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष—खासतौर पर ईरान से जुड़ा तनाव—ने वैश्विक तेल कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ। इसके चलते निवेशकों को यह आशंका होने लगी कि केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिका का फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर पड़ता है। चूंकि सोना कोई ब्याज या रिटर्न नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि सोने की मांग में कमी आई और कीमतों पर दबाव बना।

इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने की गिरावट का एक बड़ा कारण रही है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी वैश्विक मांग घटती है।

मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि हाल के हफ्तों में निवेशकों ने सोने में मुनाफावसूली भी की है। 2025 और 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं—करीब 5,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास। इसके बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में तेज गिरावट आई।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोना सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत प्रदर्शन नहीं कर पाया। आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार महंगाई, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने इस प्रभाव को कमजोर कर दिया।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे अस्थायी गिरावट मान रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय में सोना अभी भी मजबूत निवेश विकल्प बना रह सकता है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और संभावित मंदी जैसे कारक भविष्य में सोने की कीमतों को फिर से ऊपर ले जा सकते हैं।

इसके अलावा, कुछ निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीद का अवसर भी बन सकती है। जब कीमतें नीचे आती हैं, तो लंबे समय के निवेशक इसे सस्ते स्तर पर खरीदारी का मौका मानते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

अन्य कीमती धातुओं—जैसे चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम—ने भी इसी तरह का रुझान दिखाया है। हालांकि इनमें हाल के दिनों में हल्की तेजी आई है, लेकिन पूरे महीने के दौरान इनकी कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर, सोने का यह प्रदर्शन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि केवल पारंपरिक धारणा के आधार पर निवेश निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरें, मुद्रा बाजार और भू-राजनीतिक घटनाएं—सभी मिलकर कीमतों को प्रभावित करती हैं।

आने वाले समय में सोने की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और पश्चिम एशिया में तनाव किस दिशा में जाता है। फिलहाल, बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।

Summary

सोने में हालिया तेजी के बावजूद मार्च 2026 में 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज हुई, जिसका कारण महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर रहा।

Bharat Baani Bureau

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