2 अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz में एक नया और असामान्य सिस्टम उभरकर सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रणनीतिक जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए अब जहाजों को “सीक्रेट कोड” हासिल करना पड़ रहा है और कई मामलों में चीनी मुद्रा युआन या अन्य माध्यमों में फीस भी चुकानी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार, ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए एक तरह का “टोलबूथ सिस्टम” विकसित कर लिया है। इस सिस्टम के तहत जहाजों को पहले जांच और मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बाद उन्हें एक विशेष अनुमति कोड दिया जाता है, जिसके जरिए वे सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर सकते हैं।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन जहाजों के लिए लागू होती है, जो ईरान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखने वाले देशों से जुड़े हैं। कई मामलों में जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने के लिए ईरान की सुरक्षा एजेंसियों, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), द्वारा एस्कॉर्ट भी किया जा रहा है।
इस “टोल सिस्टम” का एक और महत्वपूर्ण पहलू भुगतान है। कुछ जहाजों से पारगमन के बदले शुल्क लिया जा रहा है, जो अक्सर चीनी मुद्रा युआन में किया जाता है। यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए उठाया गया माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ जहाजों ने लाखों डॉलर तक की राशि चुकाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल प्रतीकात्मक शुल्क नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक तंत्र बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम केवल आर्थिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। Iran इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल वैश्विक दबाव बनाने के लिए कर रहा है। चूंकि दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।
इस नई व्यवस्था के कारण जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। कई शिपिंग कंपनियां जोखिम से बचने के लिए अपने जहाजों को रोक रही हैं या वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं। वहीं, कुछ जहाज “सीक्रेट कोड” और भुगतान के जरिए इस रास्ते से गुजरने का विकल्प चुन रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून को भी चुनौती देती है। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून के तहत ऐसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार होता है, और किसी भी प्रकार का टोल लगाना विवादास्पद माना जाता है।
हालांकि, ईरान का कहना है कि यह व्यवस्था सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। उसका दावा है कि मौजूदा संघर्ष और हमलों के खतरे को देखते हुए जहाजों की जांच और नियंत्रित मार्ग देना जरूरी है। इसके विपरीत, कई देश और विशेषज्ञ इसे “गैरकानूनी” और वैश्विक व्यापार के लिए खतरा मानते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। खासकर एशियाई देशों, जिनकी ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक इस मार्ग पर निर्भर है, पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, Strait of Hormuz में उभरा यह “सीक्रेट कोड और युआन फीस” मॉडल केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। यह दिखाता है कि कैसे एक रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई चुनौतियों के सामने ला सकता है।
Summary
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को गुजरने के लिए सीक्रेट कोड और युआन में फीस देनी पड़ रही है, जिससे ईरान का नियंत्रण बढ़ा और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा।
