09 सितंबर 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : आयकर रिटर्न (ITR) समय पर, यानी 15 सितंबर तक दाखिल करना सिर्फ नियम पूरा करने के लिए नहीं है। अगर आप देरी करते हैं, तो केवल जुर्माना ही नहीं बढ़ता, बल्कि ब्याज, टैक्स लाभ का नुकसान और भविष्य की वित्तीय योजना पर असर भी पड़ सकता है। यह जानकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट नियति शाह, 1 फाइनेंस में पर्सनल टैक्स वर्टिकल की हेड ने दी।
देर से फाइल करने का जुर्माना (Section 234F)
आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत रिटर्न समय पर नहीं भरने पर जुर्माना लागू होता है:
- कुल इनकम 5 लाख रुपये तक: 1,000 रुपये
- इनकम 5 लाख रुपये से अधिक: 5,000 रुपये
शाह ने बताया, “यह जुर्माना तब भी लागू होगा जब आपका टैक्स पहले ही TDS के जरिए कट चुका हो और अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता न हो।”
अतिरिक्त ब्याज चार्ज (Sections 234A, 234B, 234C)
सिर्फ जुर्माना ही नहीं, देर से रिटर्न पर बिना भरे या कम भरे टैक्स पर भी ब्याज लगता है:
- 234A: 16 सितंबर से रिटर्न दाखिल होने तक 1% प्रति माह
- 234B: यदि एडवांस टैक्स 90% से कम भरा हो, तो 1 अप्रैल से 1% प्रति माह
- 234C: मिस या कम एडवांस टैक्स इंस्टॉलमेंट पर 1% प्रति माह
शाह ने बताया, “जिन लोगों की टैक्स देनदारी ज्यादा होती है, उनके लिए थोड़ी सी देरी भी कुल टैक्स बिल को काफी बढ़ा सकती है।”
ये नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं-
- रिफंड में देरी: रिटर्न देर से दाखिल होने पर रिफंड मिलने में समय लग सकता है।
- लॉस कैरी-फॉरवर्ड बंद: बिजनेस इनकम और कैपिटल गेन लॉस कैरी-फॉरवर्ड नहीं किए जा सकते। सिर्फ हाउस प्रॉपर्टी लॉस और डिप्रिसिएशन कैरी-फॉरवर्ड होता है।
- पुराना टैक्स रिजीम विकल्प नहीं: देर से फाइल करने वाले को नए टैक्स रेजीम में डाल दिया जाता है, चाहे पुराना रेजीम टैक्स के हिसाब से बेहतर हो।
- लोन और वीजा पर असर: बैंक, NBFC और एम्बेसी अक्सर ITR प्रमाण मांगते हैं। देर से दाखिल रिटर्न से लोन या वीजा अप्रूवल में परेशानी हो सकती है।
उदाहरण से समझें:
मान लीजिए कोई सैलरीड व्यक्ति जिसकी इनकम लगभग 12 लाख रुपये है। अगर वह 1 अक्टूबर को फाइल करता है बजाय 15 सितंबर के, तो शाह के अनुसार खर्च इस तरह होंगे:
- टैक्स देनदारी (नया रेजीम): 83,200 रुपये
- देर से फाइलिंग जुर्माना (234F): 5,000 रुपये
- ब्याज (234A): 832 रुपये
- ब्याज (234B): 4,992 रुपये
- ब्याज (234C): 4,202 रुपये
कुल खर्च: 98,226 रुपये
शाह का कहना है, “15 सितंबर के बाद ITR फाइल करना सिर्फ जुर्माना बढ़ाने वाला नहीं है, बल्कि टैक्स लचीलापन और कैश फ्लो पर भी असर डालता है। समय पर रिटर्न फाइल करना अब वित्तीय सुरक्षा बन चुका है।”
