19 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : दुनिया के अमीर और ताकतवर लोग स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस में इकट्ठा हो रहे हैं, जहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 की मीटिंग शुरू होने वाली है। इसी बीच ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अमीरों और आम लोगों के बीच बढ़ती खाई पर चिंता जताई गई है।
अरबपतियों की संपत्ति रिकॉर्ड स्तर पर
ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अरबपतियों की कुल संपत्ति 16 फीसदी से ज्यादा बढ़ी और यह बढ़कर 18.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई। भारतीय मुद्रा में यह रकम ₹1,660 ट्रिलियन से ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया कि अरबपतियों की संपत्ति पिछले पांच साल के औसत के मुकाबले तीन गुना तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में हर चार में से एक व्यक्ति को भरपेट खाना नहीं मिलता। वहीं, दुनिया की लगभग आधी आबादी गरीबी में जीवन बिता रही है। इसके बावजूद कुछ गिने-चुने लोग अपनी दौलत लगातार बढ़ा रहे हैं।
अमीरों का राजनीति पर कब्जा
ऑक्सफैम का कहना है कि अरबपति आम लोगों के मुकाबले 4,000 गुना ज्यादा राजनीतिक पदों पर पहुंचने की संभावना रखते हैं। रिपोर्ट में 66 देशों के सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया कि करीब आधे लोगों का मानना है कि अमीर लोग चुनाव खरीद लेते हैं।
इस रिपोर्ट का नाम है ‘Resisting the Rule of the Rich: Protecting Freedom from Billionaire Power’। इसमें बताया गया है कि कैसे बहुत अमीर लोग अपने फायदे के लिए राजनीति, कानून और नीतियों को अपने हिसाब से ढाल रहे हैं, जिससे आम लोगों के अधिकार और आजादी को नुकसान हो रहा है।
ट्रंप सरकार पर भी सवाल
ऑक्सफैम ने कहा कि अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप सरकार की नीतियों से भी अरबपतियों को फायदा मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, अमीरों पर टैक्स कम किया गया, बड़ी कंपनियों पर सख्ती घटाई गई और टेक व एआई कंपनियों के शेयरों में तेजी से सुपर-रिच और ज्यादा अमीर हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अरबपतियों की संख्या पहली बार 3,000 के पार पहुंच गई। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति ईलॉन मस्क पहले ऐसे इंसान बने जिनकी संपत्ति 500 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई।
ऑक्सफैम ने बताया कि सिर्फ पिछले साल अरबपतियों की संपत्ति 2.5 ट्रिलियन डॉलर बढ़ी। यह रकम इतनी है कि इससे 26 बार पूरी दुनिया से अत्यधिक गरीबी खत्म की जा सकती है।
विरोध और गुस्सा बढ़ा
ऑक्सफैम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमिताभ बेहर ने कहा कि अमीरों और आम लोगों के बीच बढ़ती खाई बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा, “आर्थिक गरीबी भूख पैदा करती है और राजनीतिक गरीबी गुस्सा।” रिपोर्ट में बताया गया कि 68 देशों में 142 से ज्यादा बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए, जिनमें कई जगह लोगों पर हिंसा भी हुई।
ऑक्सफैम ने कहा कि दुनिया की आधी से ज्यादा बड़ी मीडिया कंपनियां अरबपतियों के हाथ में हैं। सोशल मीडिया कंपनियों पर भी अमीरों का कब्जा है। रिपोर्ट में जेफ बेजोस, ईलॉन मस्क और अन्य अरबपतियों के उदाहरण दिए गए हैं।
ऑक्सफैम ने सरकारों से मांग की है कि वे असमानता कम करने की ठोस योजना बनाएं, सुपर-रिच पर सही तरीके से टैक्स लगाएं, और दौलत और राजनीति के बीच मजबूत दीवार खड़ी करें। साथ ही आम लोगों के अधिकारों, संगठनों और ट्रेड यूनियनों की सुरक्षा की भी मांग की गई है।
सारांश
66 देशों में किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि अमीर उम्मीदवार अपने धन के बल पर चुनाव जीतने की संभावना बढ़ा लेते हैं। सर्वे में यह दावा किया गया है कि पैसे का चुनावी परिणामों पर सीधा असर होता है।
