23 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : शिवसेना पार्टी के संस्थापक और महाराष्ट्र की राजनीति के प्रसिद्ध चेहरे बालासाहेब ठाकरे की आज 23 जनवरी को 100वीं जयंती है। बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने बाल ठाकरे के साथ अपनी पुरानी तस्वीरों को शेयर करते हुए उनकी जमकर तारीफ की है। पीएम मोदी ने बाल ठाकरे को तेज़ बुद्धि, जबरदस्त भाषण कला और पक्के विश्वास वाला नेता बताया है।

क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने X पर ट्वीट में कहा- “महान बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर, हम एक ऐसी महान हस्ती को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने महाराष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से आकार दिया।अपनी तेज बुद्धि, जबरदस्त भाषण कला और पक्के विश्वास के लिए जाने जाने वाले बालासाहेब का लोगों के साथ एक अनोखा जुड़ाव था। राजनीति के अलावा, बालासाहेब को संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता से भी गहरा लगाव था। एक कार्टूनिस्ट के तौर पर उनका करियर समाज पर उनकी गहरी नज़र और विभिन्न मुद्दों पर उनकी निडर टिप्पणी को दिखाता है। हम महाराष्ट्र की प्रगति के लिए उनके विज़न से बहुत प्रेरित हैं और इसे पूरा करने के लिए हमेशा काम करेंगे।”

पीएम मोदी ने दी बसंत पंचमी की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने देश के लोगों को बसंत पंचमी की भी शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने कहा- “आप सभी को प्रकृति की सुंदरता और दिव्यता को समर्पित पावन पर्व बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद हर किसी को प्राप्त हो। उनकी कृपा से सबका जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि से सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।”

सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धांजलि

23 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भी जयंती है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा- “नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने मुझे हमेशा बहुत प्रेरित किया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन हमें बताता है कि वीरता और शौर्य के मायने क्या होते हैं। पराक्रम दिवस हमें इसी का स्मरण कराता है। एतदेव परं शौर्यं यत् परप्राणरक्षणम्। नहि प्राणहरः शूरः शूरः प्राणप्रदोऽर्थिनाम्॥ हमारी सरकार ने 2021 में नेताजी बोस के सम्मान में, उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है।”

सारांश:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ लोगों को धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने वाला करार देते हुए उन्हें “कालनेमी” कहा। इस बयान के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत और असंगत हैं। स्वामी ने स्पष्ट किया कि वे सनातन धर्म या धर्म की कमजोर करने की बात नहीं कर रहे, बल्कि गोहत्या रोकने और धर्म के मूल सिद्धांतों पर ध्यान देने की बात कह रहे थे। उन्होंने योगी सरकार के नोटिस और रवैये को दुर्भावनापूर्ण बताया और अपने पक्ष में प्रतिक्रिया दी।

संक्षेप में, यह विवाद माघ मेले के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य के टकराव के बीच उत्पन्न हुआ, जहां धर्म और प्रशासनिक नियंत्रण के मुद्दे पर बयानबाज़ी बढ़ गई।

Bharat Baani Bureau

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