23 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : या कुन्देन्दु तुषारहार धवला,या शुभ्र वस्त्रावृता या वीणा वरदण्ड मण्डित करा,या श्वेत पद्मासना। मां सरस्वती ज्ञान की देवी और हर उस बच्चे की उम्मीद, जिसके हाथ में किताब है और आंखों में भविष्य का सपनाआज वसंत पंचमी है–वो दिन, जब कुदरत भी पीले रंग में मुस्कुराती है–पीले फूल, पीला तिलक और चारों तरफ पॉजिटिव एनर्जी.. क्योंकि पीला रंग ख़ुशी ,बुद्धि और सकारात्मकता की निशानी है। जी हां वसंत पंचमी पर पीला रंग सिर्फ परंपरा नहीं इसका एक सांइस कनेक्शन भी है। न्यूरोसाइंस कहती है कि पीला रंग दिमाग के अलर्ट सेंटर को एक्टिव करता है। रिसर्च के मुताबिक येलो वेवलेंथ देखने से ब्रेन में डोपामाइन और कंसंट्रेशन से जुड़े सिग्नल तेज होते है यही वजह है कि पढ़ाई के कमरे में हल्का पीला रंग बच्चों को फोकस्ड रखता है। 

वैसे आज के दिन किताबें मंदिर में मां के चरणों में रखी जाती हैं और प्रार्थना होती है। मां, बस इस बार पार लगा देना, अच्छे नंबर ला देना और इन दिनों, इसके और मायने है क्योंकि कुछ ही दिनों में परीक्षाएं हैं। सिलेबस दोहराया जा रहा है और हर घर में एक ही आवाज सुनाई दे रही है। पढ़ लो, फोन छोड़ो , पढ़ाई में ध्यान क्यों नहीं लगता ? लेकिन आज के दिन सवाल सिर्फ बच्चों से नहीं आज सवाल पेरेंट्स से भी है क्या सिर्फ टोकते रहना ही अच्छी परवरिश है या पढ़ाई के लिए सही माहौल देना भी उतना ही ज़रूरी है ?कई बच्चे फ़ोन छोड़े उसके लिए ज़रूरी है मम्मी-पापा भी मोबाइल से दूरी बनाए। बच्चा TV न देखे, तो मम्मी-पापा को भी टीवी से दूर रहने का ये त्याग करना होगा। घर में पॉजिटिव माहौल, शोर, तनाव, गुस्सा सबको कम करना होगा..क्योंकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक। बच्चा जितना किताब से नहीं भटकता, उससे ज्यादा माहौल से भटकता है। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बच्चे औसतन करीब 7 घंटे मोबाइल-इंटरनेट पर रहते हैं। अब ऐसे में अगर घर का माहौल भी ख़राब हो तो बच्चे कहां से पढ़ाई पर फोकस कर पाएगा। वैसे अगर अपने दिन याद करो तो कैसे लगता था कि पूरे परिवार के एक्जाम चल रहे हों। टीवी-म्यूजिक तो भूल ही जाइए, घर में कोई ऊंची आवाज में बात भी नहीं करता था। लेकिन अब वक्त बदल गया अब ना घरों में वैसा माहौल है और ना ही वैसी परंपरा। मतलब ये कि आज के शुभ मौके पर सबसे पहले ये तय कीजिए कि आपके घर में पढ़ने-लिखने का माहौल तो ठीक है और यही मां सरस्वती का असली आशीर्वाद भी है। 

कंसंट्रेशन कैसे बढ़ाएं

एक निश्चित दिनचर्या

बच्चों के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। जब उन्हें पता होता है कि किस समय क्या करना है, तो उनका मस्तिष्क उस काम के लिए तैयार रहता है। सोने, जागने, पढ़ने और खेलने का समय तय करें। पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें (8-10 घंटे), क्योंकि थकान से ध्यान भटकता है।

डिस्ट्रैक्शन को दूर करें
पढ़ते समय एकाग्रता बनाए रखने के लिए शांत माहौल जरूरी है। पढ़ाई के कमरे में TV या शोर-शराबा न हो। पढ़ते समय मोबाइल फोन और टैबलेट को दूर रखें। उनकी स्टडी टेबल साफ-सुथरी और व्यवस्थित रखें।

माइंड गेम्स
खेल-खेल में एकाग्रता बढ़ाना सबसे आसान तरीका है। पहेलियां, सुडोकू, और शतरंज जैसे खेल खिलाएं। ‘स्पॉट द डिफरेंस’ वाले गेम भी बहुत कारगर होते हैं। मेमोरी कार्ड गेम्स से उनकी याददाश्त तेज होती है।

बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटें
अगर बच्चे को कोई बड़ा चैप्टर या प्रोजेक्ट करना है, तो वह घबरा सकता है और ध्यान खो सकता है। काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें। हर छोटे हिस्से के पूरा होने पर उन्हें छोटी सी तारीफ या शाबाशी दें।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

सारांश:
बच्चों की एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाना उनके सीखने और पढ़ाई में सुधार लाता है। इसके लिए नियमित समय पर पढ़ाई, पोषण युक्त आहार, पर्याप्त नींद, खेलकूद, ध्यान और ब्रेन एक्सरसाइज जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं। सही माहौल और प्रेरणा से बच्चों की कॉन्संट्रेशन पावर में सुधार संभव है।

Bharat Baani Bureau

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