इस्लामाबाद 30 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है. जहां इस डील को भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसके असर को लेकर चिंता और बेचैनी साफ दिख रही है. दोनों देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते से उनके निर्यात, खासकर टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर, को भारी नुकसान हो सकता है.

भारत-EU डील में क्या तय हुआ?

नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बनी. इस डील के तहत भारत के 99 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी. लगभग 33 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर लगने वाला 10 प्रतिशत तक का टैरिफ धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा. इसके बदले EU को उम्मीद है कि 2032 तक उसका भारत को होने वाला निर्यात दोगुना हो जाएगा. कृषि, प्रोसेस्ड फूड, आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज और एजुकेशन जैसे सेक्टर इस डील के बड़े फायदे पाने वाले हैं.

भारत-EU की डील से पाकिस्तान में क्यों मचा हड़कंप?

ARY न्यूज के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गौहर एजाज ने इस डील को पाकिस्तान के लिए गंभीर खतरा बताया है. लाहौर में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत-EU समझौते से पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है. गौहर एजाज के मुताबिक, पाकिस्तान के करीब 9 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा और इससे देशभर में 1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पहले EU पाकिस्तान को खास व्यापारिक रियायतें देता था, लेकिन अब भारत समेत सभी क्षेत्रीय देशों को जीरो-टैरिफ का फायदा मिलेगा, जिससे पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त खत्म हो गई है. उनका कहना है कि अगर पाकिस्तान सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, बिजली-गैस की दरें कम नहीं कीं और टैक्स सिस्टम को क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं बनाया, तो उद्योग टिक नहीं पाएंगे.

बांग्लादेश में चिंता क्यों बढ़ी?

बांग्लादेश में भी इस डील को लेकर माहौल चिंताजनक है. बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार में एक एडिटोरियल में लिखा गया. इसके मुताबिक बांग्लादेश के विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 से जब भारत-EU समझौता पूरी तरह लागू होगा, तब भारतीय रेडीमेड गारमेंट्स को यूरोप में जीरो टैरिफ मिलेगा. अभी भारतीय कपड़ों पर 9 से 12 फीसदी का शुल्क लगता है. वहीं बांग्लादेश को अभी LDC यानी कम विकसित देश होने का फायदा मिल रहा है और वह यूरोप को बिना शुल्क गारमेंट्स निर्यात करता है. लेकिन नवंबर में LDC स्टेटस खत्म होने के बाद बांग्लादेश को सिर्फ तीन साल की राहत मिलेगी. उसके बाद अगर कोई नई डील नहीं हुई, तो उसे 12 प्रतिशत तक टैरिफ देना पड़ सकता है.

बांग्लादेशी एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ऐसे हालात में उसके गारमेंट निर्यात में करीब 16 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. EU पहले ही अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ के बाद खरीदारों के लिए सख्त बाजार बन चुका है, और भारत की मजबूत कॉटन सप्लाई उसे बांग्लादेश से आगे कर देती है.

सारांश:
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ट्रेड डील से भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इस समझौते से भारत का निर्यात बढ़ेगा, निवेश आएगा और कई सेक्टर में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। वहीं, इसका असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान में करीब 1 करोड़ लोगों की नौकरियों पर संकट गहराने की आशंका है, जबकि बांग्लादेश को भी व्यापारिक नुकसान का डर सता रहा है।

Bharat Baani Bureau

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