नई दिल्ली 30 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) . जब भी बॉलीवुड में पावरफुल महिला पुलिस अधिकारियों की बात होती है तो सबसे पहले शिवानी शिवाजी रॉय का नाम याद आता है. 2014 में जब रानी मुखर्जी ‘मर्दानी’ के रूप में पर्दे पर आईं तो उन्होंने न सिर्फ ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की, ₹21 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹60 करोड़ कमाए. 2019 में इसके सीक्वल ने भी सफलता की कहानी दोहराई, ₹27 करोड़ के बजट पर ₹67 करोड़ कमाए.

अब 2026 है. कोविड के बाद सिनेमा की दुनिया बदल गई है, दर्शकों का टेस्ट बदल गया है और बॉक्स ऑफिस के समीकरण भी बदल गए हैं. इस स्थिति में आदित्य चोपड़ा ने फिल्म का स्केल और बजट दोनों बढ़ा दिया है. क्या आज 30 जनवरी को रिलीज हुई ‘मर्दानी 3’ सच में उस रोमांच को बनाए रखने में कामयाब रही है? आइए विस्तार से जानते हैं.

कहानी
‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज अपने एलिमेंट्स के लिए जानी जाती है- एक जघन्य अपराध, एक सनकी विलेन और शिवानी शिवाजी रॉय द्वारा उनका पीछा करना. इस बार कहानी एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस से शुरू होती है. एक राजदूत की बेटी का अपहरण हो जाता है, लेकिन मामला तब और जटिल हो जाता है जब पता चलता है कि उसके साथ उसके केयरटेकर की बेटी का भी अपहरण हो गया है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, शिवानी एक ऐसे नेटवर्क का सामना करती है जो ‘भिखारी माफिया’ और अंग तस्करी की जड़ों तक फैला हुआ है. इस अंधेरे साम्राज्य की रानी अम्मा (मल्लिका प्रसाद) है. अम्मा कोई आम अपराधी नहीं है. वह काफी बेरहम है और उसकी ताकत शहर की नालियों से लेकर सबसे ऊंचे तबके तक फैली हुई है. फिल्म का पहला हाफ काफी दिलचस्प है. जब तक शिवानी लड़कियों को ढूंढने की कोशिश कर रही है, कहानी आपको बांधे रखती है.

एक्टिंग
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत और सरप्राइज पैकेज मल्लिका प्रसाद (अम्मा) हैं. ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज हमेशा अपने विलेन के लिए जानी जाती रही है. मल्लिका ने उस विरासत को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया है. उसकी परफॉर्मेंस इतनी डरावनी है कि जब भी वह स्क्रीन पर आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. एक विलेन के तौर पर वह सीधे दर्शकों के दिमाग पर असर डालती है. हालांकि, जब रानी मुखर्जी की बात आती है, तो थोड़ी निराशा होती है. पिछले दो पार्ट्स में शिवानी के किरदार में जो ‘आग’ और ‘एनर्जी’ थी, वह इस बार कुछ कम है. रानी कई सीन में काफी लाउड और ड्रामैटिक लगती हैं. कई जगह उनका चिल्लाना बनावटी लगता है, जो शिवानी की आमतौर पर शांत और मजबूत पर्सनैलिटी से मेल नहीं खाता. जानकी बोदीवाला ने अपना काम ईमानदारी से किया है, लेकिन उनके किरदार की राइटिंग इतनी कमजोर है कि वह अपनी पूरी कोशिश के बावजूद ज्यादा कुछ नहीं कर पातीं.

कमियां
‘मर्दानी 3’ की सबसे बड़ी कमजोरी इसका क्लाइमैक्स है. पहला हाफ और दूसरे हाफ की शुरुआत आपको उत्साहित रखती है और सस्पेंस धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन जैसे ही फिल्म अपने क्लाइमैक्स के करीब पहुंचती है, सब कुछ जल्दबाजी में खत्म कर दिया जाता है. क्लाइमैक्स में जो इमोशनल गहराई होनी चाहिए थी, वह गायब है. दर्शक शिवानी और लड़कियों के दर्द से उस तरह से कनेक्ट नहीं हो पाते जैसा कि पिछले पार्ट्स में हुआ था. फिल्म की शुरुआत में इसकी गति काफी धीमी है. हालांकि कहानी अच्छी है, इसलिए आप बोर नहीं होते, लेकिन एक थ्रिलर में जो ‘पकड़’ होनी चाहिए, वह कभी-कभी गायब हो जाती है.

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी
डायरेक्टर अभिराज मीनावाला ने इस फिल्म को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की है, लेकिन इस चक्कर में उन्होंने ‘मर्दानी’ के रॉ और रियलिस्टिक फील को कुछ हद तक खो दिया है. फिल्म का डायरेक्शन औसत से बेहतर है, लेकिन प्रभावशाली नहीं है. जहां तक ​​सिनेमैटोग्राफी की बात है, कैमरा वर्क शानदार है. भिखारी माफिया के ठिकाने और शहर के अंधेरे कोनों को खूबसूरती और खतरनाक तरीके से फिल्माया गया है. लाइटिंग और फ्रेमिंग फिल्म के डार्क टोन को सपोर्ट करते हैं और सफलतापूर्वक एक अलग माहौल बनाते हैं.

बैकग्राउंड स्कोर
किसी भी क्राइम थ्रिलर फिल्म की जान उसका बैकग्राउंड स्कोर (BGM) होता है, और ‘मर्दानी 3’ के मामले में यह बात पूरी तरह सटीक बैठती है. फिल्म का संगीत कहानी के डार्क और तनावपूर्ण माहौल को गहराई देने का काम करता है. जहां फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, वहां इसका थ्रिलिंग स्कोर दर्शकों की धड़कनें बढ़ाने में कामयाब रहता है. विशेष रूप से, विलेन ‘अम्मा’ के दृश्यों में इस्तेमाल किया गया ‘साउंड डिजाइन’ रोंगटे खड़े कर देने वाला है. वह अजीबोगरीब और डरावनी ध्वनियां अम्मा के सनकीपन को और भी खौफनाक बनाती हैं. वहीं, शिवानी शिवाजी रॉय के एक्शन सीन्स में ‘मर्दानी’ का सिग्नेचर थीम म्यूजिक एक अलग ही जोश भरता है. कुल मिलाकर यह फिल्म के सस्पेंस और थ्रिल को अंत तक जीवित रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

आखिरी फैसला
‘मर्दानी 3’ एक अच्छी फिल्म है, लेकिन यह अपनी पिछली दो फिल्मों (खासकर पहली मर्दानी) के लेवल तक नहीं पहुंच पाती. यह क्राइम थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए एक बार देखने लायक फिल्म है. अगर आप रानी मुखर्जी के बहुत बड़े फैन हैं, तो आपको उनकी परफॉर्मेंस पसंद आ सकती है, लेकिन एक निष्पक्ष दर्शक के तौर पर आपको पुरानी शिवानी शिवाजी रॉय की कमी खलेगी. फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ‘अम्मा’ का किरदार है, जो इसे कम से कम एक बार देखने लायक बनाता है. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार.

सारांश:
Mardaani 3 में रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं। फिल्म में महिला सुरक्षा, अपराध और सिस्टम से लड़ाई जैसे मुद्दों को दमदार तरीके से दिखाया गया है। एक्शन और इमोशनल सीन्स के साथ कहानी दर्शकों को बांधे रखती है, हालांकि कुछ जगहों पर स्क्रिप्ट थोड़ी कमजोर लगती है। फिर भी रानी की एक्टिंग और मजबूत मैसेज फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *