02 फ़रवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो): सरकार ने पान मसाला पर टैक्स वसूलने के पुराने तरीके को बदलकर अब इसे सीधे उत्पादन क्षमता से जोड़ दिया है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को अब अपनी मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता के अनुसार टैक्स देना होगा। इस बदलाव के बाद पान मसाला पर कुल टैक्स 88 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना रहेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान सरकार को इस मद से करीब 14,000 करोड़ रुपये की मोटी कमाई होने की उम्मीद है, जबकि चालू वर्ष के अंतिम दो महीनों में ही 2,330 करोड़ रुपये खजाने में आने का अनुमान है।
सुरक्षा और सेहत के लिए बनेगा ‘स्पेशल फंड’
इस नए टैक्स (सेस) से होने वाली कमाई को सरकार एक खास मकसद के लिए इस्तेमाल करेगी। वित्त मंत्री के अनुसार, इस धन का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं को चलाने के लिए किया जाएगा। यह पैसा राज्यों के साथ भी साझा किया जाएगा ताकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों और अन्य चिकित्सा गतिविधियों को गति दी जा सके। इसका उद्देश्य देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेहत के लिए संसाधनों का एक स्थायी स्रोत बनाना है।
सारांश:
पान मसाला पर कुल 88% टैक्स और सेस लगाने से सरकार को लगभग ₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर पड़ेगा।
