10 फ़रवरी2026 (भारत बानी ब्यूरो) :  सरकार द्वारा जारी किए गए मसौदा इनकम टैक्स नियमों में कई नए और अहम बदलावों का सुझाव दिया गया है। नए नियमों के तहत, कैश ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी और गाड़ी की खरीद, होटल बिल के भुगतान के लिए जरूरी PAN की जरूरत में बदलाव किए जाएंगे। इसके अलावा, मसौदा नियमों में कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की वैल्यू बढ़ाने और क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ जानकारी शेयर करना जरूरी होगा। इसमें सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट को मान्यता देना भी शामिल है

CBDT ने पेश किए मसौदा नियम

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को देश का बजट पेश किया था। बजट पेश किए जाने के कुछ दिनों बाद CBDT ने नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 से जुड़े मसौदा नियमों और फॉर्म्स पब्लिक कमेंट्स के लिए पेश किए हैं।

कब और कहां जरूरी होगा PAN

मिन्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित इनकम टैक्स नियम, 2026 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के एक या एक से ज्यादा बैंक खातों में, एक वित्तीय वर्ष में कुल 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश डिपॉजिट या विड्रॉल किया जाता है तो वहां पैन देना जरूरी होगा। मौजूदा नियमों के तहत, एक दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश जमा करने पर पैन बताया होता है।

गाड़ी खरीदने के लिए कब जरूरी होगा पैन

नए नियमों के तहत, गाड़ी खरीदने के मामले में भी पैन बताने के लिए कीमत की लिमिट में बदलाव किया जा रहा है। नए नियमों के तहत, अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये से ज्यादा की कार या बाइक खरीद रहा है तो उसे पैन नंबर देना होगा। अभी बाइक के लिए पैन की जरूरत नहीं होती, जबकि आप चाहें 4 लाख की ही कार क्यों न खरीदें, आपको पैन बताना पड़ता है।

प्रॉपर्टी के मामले में कहां पड़ेगी पैन नंबर की जरूरत

मौजूदा नियमों में किसी भी अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री, गिफ्ट या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के लिए लिमिट 10 लाख रुपये की लिमिट तय है। नए नियमों के तहत ये लिमिट बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जा रही है। इसके अलावा, होटल-रेस्टोरेंट के बिल, कन्वेंशन सेंटर, बैंक्वेट हॉल या इवेंट मैनेजमेंट के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा के भुगतान के लिए PAN देना जरूरी होगा। अभी ये लिमिट 50,000 रुपये है।

सारांश :

सरकार ने कैश ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी और वाहन खरीद से जुड़े पैन कार्ड नियमों में बदलाव के लिए मसौदा नियम जारी किए हैं। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य बड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है।

Bharat Baani Bureau

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