16 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : आजकल हॉर्मोन से जुड़ी बीमारियों की संख्या काफी बढ़ गई  है। इसमें न सिर्फ आपके अनुवांशिक रोग शामिल है बल्कि लाइफस्टाइल और खान पान से जुडी बीमारियां भी हैं। ऐसी ही एक गंभीर समस्या है थायरॉइड। मनुष्य के शरीर में थायराइड नामक एक ग्रंथि होती है जो शरीर के अंदर ऊर्जा, मेटाबोलिज्म, प्रजनन क्षमता, वजन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करने का कार्य करती है। ऐसी बीमारियों के लिए आधुनिक चिकित्सा में कोई ऐसी दवा नहीं है जो बीमारी को जड़ से ख़त्म  कर सके बल्कि वह ज़िन्दगी भर चलने वाली दवाओं के सहारे इसे कंट्रोल करते हैं। वहीं आयुर्वेद में थायरॉइड को जड़ से खत्म करने की शक्ति मौजूद है। 

आयुर्वेद में थायराइड को कैसे समझा जाता है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा ((आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार थायराइड त्रिदोषों यानी वात, पित्त, कफ के असंतुलन का परिणाम है। इसे किसी रोग के रूप में समझने से मरीज पहले ही घबरा जाते हैं। इसलिए आयुर्वेद में इसे रोग के रूप में नहीं देखा जाता है। 

हाइपोथायराइड (Hypothyroidism)- यह स्थिति अक्सर शरीर में कफ दोष के बढ़े हुए स्तर के कारण होती है। इसके लक्षण में ठंड लगना, वजन बढ़ना, थकान महसूस होना और टेंशन शामिल हैं। 

हाइपरथायराइड (Hyperthyroidism)- ऐसा ज्यादातर पित्त दोष के बढ़ने के कारण होता है। इसके लक्षणों में नींद न आना, पसीना आना, वजन कम होना, बेचैनी और चिड़चिड़ापन शामिल हैं।

आयुर्वेद के अनुसार थायरॉइड एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के अंदर मौजूद अग्नि (Digestive Fire) और आम (Toxins) की भूमिका बढ़ जाती है। 

थायराइड होने के आयुर्वेदिक कारण

  • पाचन शक्ति का कमजोर होना 
  • खान-पान और जीवनशैली का अव्यवस्थित होना 
  • अत्यधिक तनाव और चिंता
  • पर्याप्त नींद न लेना 
  • हार्मोन का संतुलित न होना 
  • लंबे समय तक किसी रोग की दवा खाना 
  • शारीरिक रूप से सक्रिय न होना 

आयुर्वेदिक में थायराइड का इलाज

थायराइड को आयुर्वेद के अनुसार तीन स्तरों पर नियंत्रित किया जा सकता है।

1- अग्नि में सुधार- जब किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति अच्छी होती है तब उसके हार्मोन अपने आप बैलेंस हो जाते हैं। इस कंडीशन में आप थायरॉइड जैसी समस्या को मैनेज करने में सक्षम हो पाते हैं। 

2- दोष संतुलन- चूंकि यह रोग वात, पित्त और कफ के असंतुलन के कारण होता है इसलिए थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता सुधारने के लिए आप पहले त्रिदोषों को संतुलित कर सकते हैं। 
3- आम (टॉक्सिन्स) का नाश- आपके शरीर में कई तरह के विषाक्त पदार्थ मौजूद होते हैं जो रोग का कारण बनते हैं, इसलिए आप चाहें तो उनके बाहर निकालकर भी इस स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं।  

थायराइड में आहार (Diet) का महत्व

  • गुनगुना पानी पिएं 
  • हरी सब्जी और दाल का सेवन करें 
  • सीमित मात्रा में शुद्ध घी लें 
  • हल्दी, अदरक, काली मिर्च का सेवन करें 

थायराइड के लिए योग और प्राणायाम

  • सर्वांगासन
  • मत्स्यासन
  • भुजंगासन
  • अनुलोम-विलोम
  • भ्रामरी प्राणायाम

थायराइड के मरीज बदलें लाइफस्टाइल

  • 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद लें 
  • बहुत ज्यादा तनाव की स्थिति में ध्यान या प्राणायाम करें 
  • नियमित दिनचर्या
  • अपना स्क्रीन टाइम कम करें
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठने की कोशिश करें 

क्या आयुर्वेद से थायरॉइड ठीक हो सकता है?

आयुर्वेद में न केवल थायरॉइड के लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है बल्कि इसको जड़ से समाप्त करने की कोशिश की जाती है। वह भी बिना किसी सर्जरी और साइड इफेक्ट्स के पूरी तरह प्राकृतिक इलाज से ऐसा संभव है। आयुर्वेद की मदद से आप स्वाभाविक रूप से थायरॉइड को नियंत्रित करके जोखिम को कम कर सकते हैं। अगर आप अपनी जीवनशैली और आहार में परिवर्तन कर लें तो जल्द ही इससे छुटकारा पा सकते हैं।

सारांश:
थायराइड एक हार्मोनल समस्या है जो शरीर के मेटाबॉलिज़्म और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती है। आयुर्वेद में इसे हृदय और किडनी के साथ जुड़ी असंतुलित ऊर्जा (वात, पित्त, कफ) के आधार पर देखा जाता है। आयुर्वेदिक उपचार में हर्बल दवाएँ, पोषण, योग, प्राणायाम और लाइफस्टाइल बदलाव शामिल होते हैं, जो थायराइड के लक्षणों को नियंत्रित करने और इसे जड़ से ठीक करने में मदद करते हैं। डॉक्टर की देखरेख में इन उपायों को अपनाने से हार्मोन संतुलन सुधरता है, वजन नियंत्रित रहता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।

Bharat Baani Bureau

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