18 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अब देश के नेशनल हाईवे सिर्फ गाड़ियों की तेज रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने की नई पहल के लिए भी जाने जाएंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पहली बार ‘बी कॉरिडोर’ बनाने का फैसला किया है। इसके तहत हाईवे के किनारे ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जो मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए फायदेमंद हों। इससे प्रकृति का संतुलन बेहतर होगा और पर्यावरण को मजबूती मिलेगी।
अब तक हाईवे के किनारे ज़्यादातर सजावट के लिए पौधे लगाए जाते थे। लेकिन ‘बी कॉरिडोर’ योजना में ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जिनमें पूरे साल अलग-अलग समय पर फूल खिलें। इससे मधुमक्खियों को सालभर रस और पराग मिलता रहेगा। इससे मधुमक्खियों की संख्या और सेहत बेहतर होगी, जो खेती और फलों-सब्जियों की पैदावार के लिए बहुत जरूरी हैं।
कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?
इस योजना में नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे देशी पेड़ लगाए जाएंगे। इनके साथ झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास भी उगाई जाएंगी। सूखी लकड़ी और खोखले पेड़ों के तनों को भी नहीं हटाया जाएगा, ताकि मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले जीवों को रहने की जगह मिल सके।पेड़ों और पौधों का चुनाव इस तरह किया जाएगा कि हर मौसम में कुछ न कुछ फूल खिलते रहें और पूरे साल हरियाली बनी रहे।
हर 500 मीटर से 1 किमी पर हरित क्लस्टर
NHAI के फील्ड ऑफिस देशभर में ऐसे हाईवे सेक्शन चिन्हित करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के क्लस्टर विकसित किए जा सकें। यह दूरी मधुमक्खियों की औसत भोजन खोजने की सीमा के अनुरूप रखी जाएगी। वित्त वर्ष 2026-27 में NHAI करीब 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत ‘बी कॉरिडोर’ के तहत होंगे। प्रत्येक फील्ड ऑफिस को कम से कम तीन ऐसे कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।
पर्यावरण और कृषि को मिलेगा लाभ
इस पहल से प्रकृति में अलग-अलग तरह के पौधों और जीवों की संख्या बढ़ेगी और मधुमक्खियों जैसे कीड़ों को फूलों से पराग इकट्ठा करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फसलों में बेहतर परागण होगा और खेती की पैदावार भी बढ़ सकती है।
सारांश:
NHAI ने हाईवे किनारे पर्यावरण सुधार के लिए अनोखा योजना शुरू की है। इस योजना के तहत नीम, करंज और महुआ जैसी 40 लाख पेड़ों की कतारें लगाई जाएंगी। इससे न केवल हरी-भरी सड़कें बनेंगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम होगा, मिट्टी का संरक्षण होगा और स्थानीय जैवविविधता को बढ़ावा मिलेगा। योजना से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन में भी मदद मिलेगी।
