26 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) की बोर्ड परीक्षाओं में अब पारंपरिक यानी रटे-रटाए सवालों का युग समाप्त हो रहा है। बोर्ड ने अपनी मूल्यांकन पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए अब कॉम्पिटेंसी बेस्ड (योग्यता आधारित), केस बेस्ड और सोर्स बेस्ड इंटीग्रेटेड प्रश्नों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है। इस नए बदलाव का उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक बनाना है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अब प्रश्नपत्र इस तरह तैयार किए जा रहे हैं जो छात्र की सिर्फ याद्दाश्त का नहीं, बल्कि उनकी तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और किसी विशेष परिस्थिति को समझने की क्षमता का आकलन कर सकें। इस नए पैटर्न में ‘असर्शन-रीजन’ (कथन-कारण) आधारित सवालों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढौतरी की गई है। कैमिस्ट्री, बायोलॉजी, अकाउंटेंसी और कक्षा 10वीं के अन्य महत्वपूर्ण विषयों में भी इसी तरह के चुनौतीपूर्ण और समझ पर आधारित प्रश्नों की प्रधानता रहेगी, ताकि छात्रों को विषय की गहराई तक ले जाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार कॉम्पिटेंसी आधारित प्रश्नों को बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे छात्र रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को बेहतर तरीके से समझेंगे। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे एन.सी.ई.आर.टी. के हर सिद्धांत को गहराई से पढ़ें, सैंपल पेपर हल करते समय प्रश्नों की भाषा और तर्क को समझें तथा प्रतिदिन केस-स्टडी आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें

सारांश:

CBSE Exams में अब रट्टे का दौर खत्म हो गया है। छात्रों को अंक अब केवल याद करने से नहीं बल्कि तर्क, समझ और विश्लेषण क्षमता से मिलेंगे। इस बदलाव का मकसद छात्रों में वास्तविक समझ और सोचने की क्षमता को बढ़ावा देना है, ताकि वे पढ़ाई को सिर्फ याद रखने के बजाय लागू करना सीखें।

Bharat Baani Bureau

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