16 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अगर आप ओटीटी (OTT) की दुनिया से थोड़ा भी वाकिफ हैं तो ‘कोटा फैक्ट्री’ आपने जरूर देखा होगा। शानदार IMDb रेटिंग वाला ये शो लोगों का पसंदीदा है और इसके लोग दीवाने हैं। इस शो के किरदार भी लोगों को काफी पसंद आते हैं। इस शो का एक किरदार बालमुकुंद मीना का चेहरा आपके जेहन में जरूर होगा। चश्मा लगाए, चेहरे पर मासूमियत और बातों में गहरी संजीदगी लिए यह किरदार हर उस छात्र की कहानी कहता है जो सपनों के बोझ तले दबा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर एक आईआईटी (IIT) एस्पिरेंट का रोल निभाने वाले रंजन राज असल जिंदगी में भी उसी राह के राही थे? बिहार की मिट्टी से निकलकर माया नगरी के गलियारों तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है

पटना से पवई तक कैसे पहुंचे रंजन राज?

रंजन राज की कहानी बिहार के अरवल जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू होती है। 18 मई 1994 में पैदा हुए रंजन बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थे और उनका नाता किताबों से गहरा था। एक होनहार छात्र के रूप में उनका लक्ष्य बिल्कुल साफ था, इंजीनियर बनकर परिवार को आर्थिक मजबूती देना। इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने पटना के एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया। दो साल की कड़ी मेहनत और दिन-रात के संघर्ष के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, JEE को क्रैक किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें प्रतिष्ठित आईआईटी बॉम्बे में दाखिला मिला। यह उनके और उनके परिवार के लिए एक ऐसा क्षण था, जहां से गरीबी को पीछे छोड़ने का रास्ता बिल्कुल साफ नजर आ रहा था।

इंजीनियरिंग की क्लास और एक्टिंग का जुनून

जब रंजन आईआईटी बॉम्बे के कैंपस पहुंचे तो वहां का माहौल उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग था। उन्होंने देखा कि छात्र सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं थे, बल्कि कला और संस्कृति में भी रमे हुए थे। यहीं से उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। पवई स्थित कैंपस के रचनात्मक माहौल ने रंजन के भीतर छिपे कलाकार को झकझोर दिया। वहां के थिएटर ग्रुप्स और नाटकों में हिस्सा लेते हुए उन्हें महसूस हुआ कि उनका असली सुकून इंजीनियरिंग के फॉर्मूलों में नहीं, बल्कि अभिनय की बारीकियों में है। छठे सेमेस्टर तक आते-आते यह जुनून इतना बढ़ गया कि उन्होंने एक ऐसा साहसी कदम उठाया, जिसकी कल्पना एक मध्यमवर्गीय छात्र के लिए असंभव सी है।  इंजीनियरिंग में ही एक्टिंग का यह ‘कीड़ा’ एक जुनून बन चुका था। रंजन ने अभिनय के प्रति अपनी ईमानदारी दिखाते हुए आईआईटी जैसे संस्थान को अलविदा कह दिया और एक ‘कॉलेज ड्रॉपआउट’ बनकर अपनी नई यात्रा शुरू की। वो लड़का कल तक फॉर्मूलों में उलझा रहता था, उसे अब मंच पर अभिनय करने में सुकून मिलने लगा।

कॉलेज को कहा अलविदा

27 साल की उम्र में रंजन ने एक ऐसा फैसला लिया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। उन्होंने अपने अभिनय के प्रति प्यार के खातिर आईआईटी जैसे संस्थान को छोड़ने का मन बना लिया। इंजीनियरिंग की डिग्री को बीच में छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन रंजन अपने सपनों के प्रति ईमानदार थे। उन्होंने कॉलेज को अलविदा कहा और पूरी तरह से एक्टिंग की दुनिया में उतर गए। रंजन ने अपने करियर की शुरुआत TVF पिचर्स में एक जूनियर आर्टिस्ट के रूप में की थी।  साल 2014 में शॉर्ट फिल्म ‘इंटरवल 3डी’ से उनके करियर की नींव पड़ी, लेकिन बड़े पर्दे पर उनकी असल दस्तक 2016 में अक्षय कुमार स्टारर फिल्म ‘रुस्तम’ से हुई। इस फिल्म की सफलता ने रंजन के लिए बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) के द्वार खोल दिए।

सारांश:

एक युवा ने गरीबी से पार पाने के लिए IIT बॉम्बे का रास्ता चुना, लेकिन गणित के फॉर्मुले उनके लिए आसान नहीं थे। इसके बाद उन्होंने शिक्षा का रास्ता छोड़कर OTT इंडस्ट्री में कदम रखा और अब 9 IMDb रेटिंग वाली सीरीज दे चुके हैं। उनका सफर संघर्ष, हिम्मत और सफलता की प्रेरणा बन गया है।

Bharat Baani Bureau

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