18 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद मांगी थी। यह स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू किया गया ईरान के खिलाफ युद्ध  अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे तेल का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे वैश्विक तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और अमेरिका के सहयोगी देशों ने स्ट्रेट को सुरक्षित करने के लिए कोई सैन्य सहयोग देने से इनकार कर दिया है।

चीन उठा सकता है मौके का फायदा

एनालिस्ट्स का मानना है कि चीन इस स्थिति का फायदा उठा सकता है, क्योंकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में उलझ गया है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर रिसर्चर अली वाइन ने कहा, “ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लंबे समय से निर्धारित समिट को टालने की मांग इस बात को रेखांकित करती है कि उन्होंने इस ऑपरेशन के परिणामों को कितना कम आंका था। अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन, जिसका उद्देश्य बीजिंग को डराना था, अब उल्टा पड़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट को अकेले खोलने में नाकाम रहने के कारण वॉशिंगटन को अपने मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी से मदद मांगनी पड़ रही है।”

चीनी विदेश मंत्रालय ने नहीं दिया जवाब

चीनी विदेश मंत्रालय ने होर्मुज स्ट्रेट में मदद पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन सभी पक्षों से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने, तनाव कम करने और क्षेत्रीय अस्थिरता को वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और प्रभाव डालने से रोकने की अपील दोहराई है। ट्रंप ने 31 मार्च को बीजिंग यात्रा की योजना बनाई थी, लेकिन इसे अब टाल दिया गया है। चीन ने कभी इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी और अब दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी होने की बात कही गई है। ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि चीन को इस देरी से कोई समस्या नहीं है और उनके बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।

चीन ने भेजी मानवीय सहायता

स्टिमसन सेंटर के चीन प्रोग्राम डायरेक्टर सन यून ने कहा कि अब ईरान से जुड़ी कुछ रिक्वेस्ट चीन के लिए आसान हो सकती हैं। चीन मिडिल ईस्ट के देशों के साथ बातचीत कर रहा है और तनाव कम करने में रचनात्मक भूमिका निभाने का वादा कर रहा है। रविवार को, रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट के माध्यम से चीन ने ईरान को 2 लाख अमेरिकी डॉलर की इमरजेंसी मानवीय सहायता भेजी थी जो मिनाब के स्कूल पर बमबारी में मारे गए बच्चों और शिक्षकों के परिवारों के लिए थी। चीनी राजदूत ने स्कूल पर हुए हमले की निंदा भी की थी।

अमेरिका खुद को कर रहा कमजोर

द एशिया ग्रुप के ब्रेट फेटरली ने कहा कि स्टेट विजिट में देरी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। अमेरिका के लिए युद्ध प्रबंधन के बीच विदेश यात्रा मुश्किल है, जबकि चीन को ट्रंप की मंशा समझने के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है। अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के जेक कूपर ने कहा कि युद्ध जितना लंबा चलेगा अमेरिका के लिए चिंता का सबब होगा। कूपर ने कहा कि चीन खुश है क्योंकि अमेरिका खुद को मिडिल ईस्ट में कमजोर कर रहा है।

सारांश:
ईरान से जुड़े तनाव के बीच चीन ने होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप की अपील को नजरअंदाज कर दिया। इस कदम को चीन की रणनीतिक चाल माना जा रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।

Bharat Baani Bureau

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