अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  ईरान के साथ जारी तनाव के बीच Donald Trump ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार की डेडलाइन को “अंतिम” बताया है। हालांकि इससे पहले वे कई बार इस समयसीमा को बढ़ा चुके हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी रणनीति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने शुरू में मार्च में एक सख्त समयसीमा तय की थी, जिसमें ईरान से कुछ शर्तों को मानने और Strait of Hormuz को खोलने की मांग की गई थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने कई बार इस डेडलाइन को आगे बढ़ाया—कभी बातचीत के लिए समय देने के नाम पर, तो कभी कूटनीतिक प्रयासों के चलते।

अब ट्रंप ने साफ कहा है कि मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक का समय अंतिम है और इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस समय तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे—जैसे बिजली संयंत्र और ऊर्जा सुविधाओं—पर बड़े हमले कर सकता है।

हालांकि, इस सख्त रुख के बावजूद ट्रंप के बयान पहले भी बदलते रहे हैं। कभी वे सैन्य कार्रवाई की धमकी देते हैं, तो कभी बातचीत में प्रगति का संकेत देते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से एक “महत्वपूर्ण प्रस्ताव” आया है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है।

ईरान ने भी अमेरिका के प्रस्तावों को लेकर संदेह जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने अस्थायी युद्धविराम के बजाय स्थायी समाधान की मांग की है। साथ ही, उसने अमेरिका पर भरोसे की कमी भी जताई है, खासकर पिछले हमलों और घटनाओं के चलते।

इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। अमेरिका चाहता है कि यह जलमार्ग पूरी तरह खुला रहे, जबकि ईरान इसे अपने रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप द्वारा बार-बार डेडलाइन बढ़ाने से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। लेकिन कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह रणनीति दबाव बनाने और बातचीत को आगे बढ़ाने का हिस्सा हो सकती है।

इस बीच, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इज़राइल और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और अमेरिका भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।

दूसरी ओर, कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो सके।

वैश्विक स्तर पर भी इस स्थिति का असर देखने को मिल रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशक और देश इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या मंगलवार की डेडलाइन के बाद स्थिति और बिगड़ेगी या कोई समझौता हो पाएगा।

कुल मिलाकर, Donald Trump की “अंतिम डेडलाइन” की घोषणा एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। लेकिन पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह भी सवाल बना हुआ है कि क्या यह वास्तव में अंतिम समयसीमा होगी या फिर एक और विस्तार देखने को मिलेगा। आने वाले घंटे इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकते हैं।

Summary

डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार डेडलाइन बढ़ाने के बाद मंगलवार को अंतिम समयसीमा बताया, समझौता न होने पर ईरान पर हमले की चेतावनी दी, जिससे वैश्विक तनाव बढ़ गया।

Bharat Baani Bureau

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