16 अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :   दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग को लेकर एक बड़ा बदलाव सुझाया है। अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित जोखिम आकलन (risk assessment) को भी गाइडलाइंस में शामिल किया जा रहा है। यह बदलाव स्क्रीनिंग को “वन-साइज-फिट्स-ऑल” से हटाकर व्यक्तिगत (personalized) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालिया गाइडलाइंस के अनुसार, AI अब केवल कैंसर का पता लगाने का उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि यह पहले से ही यह अनुमान लगाने में मदद करेगा कि किस महिला को भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर होने का कितना जोखिम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक जोखिम आकलन मॉडल—जैसे परिवार का इतिहास या जेनेटिक कारक—अक्सर कई महिलाओं को “लो-रिस्क” मान लेते हैं, जबकि वास्तव में उनमें बीमारी विकसित हो सकती है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 90% महिलाएं जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर होता है, उनके पास कोई स्पष्ट पारिवारिक इतिहास नहीं होता।

AI इस समस्या को हल करने की कोशिश करता है। यह मैमोग्राम इमेज में मौजूद सूक्ष्म पैटर्न को पहचानकर भविष्य के जोखिम का अनुमान लगा सकता है—ऐसे संकेत भी पकड़ सकता है जो मानव आंख से दिखाई नहीं देते।

नई सिफारिशों के तहत AI-आधारित जोखिम आकलन की शुरुआत 35 वर्ष की उम्र से करने का सुझाव दिया गया है। इससे खासकर युवा महिलाओं में बीमारी की पहचान पहले ही संभव हो सकती है, जहां पारंपरिक स्क्रीनिंग अक्सर देर से शुरू होती है।

वैज्ञानिक शोध भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि AI सिस्टम विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और ऐसे मामलों को भी पकड़ सकता है जो अगली स्क्रीनिंग तक छूट जाते।

इसके अलावा, AI-सपोर्टेड स्क्रीनिंग से “इंटरवल कैंसर” यानी दो स्क्रीनिंग के बीच विकसित होने वाले कैंसर के मामलों में कमी देखी गई है। एक अध्ययन में यह कमी लगभग 12% तक पाई गई, जो शुरुआती पहचान को मजबूत बनाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हर महिला के लिए अलग-अलग स्क्रीनिंग योजना बनाने में मदद करेगा। उदाहरण के लिए:

  • हाई-रिस्क महिलाओं के लिए अधिक बार जांच
  • लो-रिस्क महिलाओं के लिए कम बार स्क्रीनिंग

इससे न केवल बेहतर इलाज संभव होगा बल्कि अनावश्यक टेस्ट और खर्च भी कम होंगे।

हालांकि, विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। उनका कहना है कि AI कोई “जादुई समाधान” नहीं है और इसे डॉक्टरों के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, डेटा की गुणवत्ता, एल्गोरिदम की पारदर्शिता और विभिन्न आबादी पर इसकी प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यदि AI मॉडल विविध आबादी पर ठीक से प्रशिक्षित नहीं होते, तो गलत परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

फिर भी, वैश्विक स्तर पर यह स्पष्ट हो गया है कि ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग का भविष्य AI और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के साथ जुड़ा हुआ है।

कुल मिलाकर, AI-आधारित जोखिम आकलन को गाइडलाइंस में शामिल करना ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे लाखों महिलाओं की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

सारांश:

वैश्विक विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग में AI-आधारित जोखिम आकलन शामिल करने की सिफारिश की, जिससे व्यक्तिगत स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान बेहतर होगी और इलाज के परिणाम सुधर सकते हैं।

Bharat Baani Bureau

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