मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : केंद्र सरकार ने आर्थिक दबाव झेल रहे क्षेत्रों को राहत देने के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के पांचवें संस्करण, यानी ECLGS 5.0 (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) को मंजूरी दे दी है। इस बार योजना का दायरा बढ़ाते हुए एयरलाइंस सेक्टर को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे विमानन उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण कई उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ गया है और मांग में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासकर एयरलाइंस कंपनियां ईंधन कीमतों में वृद्धि और यात्री संख्या में गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

सरकार द्वारा स्वीकृत इस योजना का कुल बजटीय प्रावधान करीब ₹18,100 करोड़ है। इसके माध्यम से लगभग ₹2.55 लाख करोड़ तक अतिरिक्त कर्ज (credit flow) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों को कार्यशील पूंजी (working capital) की कमी से उबरने में मदद मिलेगी।

इस योजना के तहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के साथ-साथ अन्य कंपनियों और एयरलाइंस को भी शामिल किया गया है। सरकार बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त कर्ज पर गारंटी देगी, जिससे ऋण देने का जोखिम कम होगा और कंपनियों को आसानी से फंड मिल सकेगा।

योजना की एक अहम विशेषता यह है कि MSMEs को 100% तक क्रेडिट गारंटी कवर मिलेगा, जबकि अन्य कंपनियों और एयरलाइंस के लिए यह कवर लगभग 90% तक होगा। इससे बैंकों को ज्यादा भरोसा मिलेगा और वे इन क्षेत्रों को कर्ज देने में अधिक सक्रिय हो सकेंगे।

एयरलाइंस सेक्टर के लिए इस योजना में विशेष प्रावधान किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सेक्टर के लिए अलग से लगभग ₹5,000 करोड़ का हिस्सा निर्धारित किया गया है, जिससे कंपनियों को वित्तीय दबाव से उबरने में मदद मिलेगी।

इस योजना के तहत मिलने वाले कर्ज की अवधि भी तय की गई है। सामान्य व्यवसायों के लिए ऋण अवधि करीब 5 साल की होगी, जिसमें शुरुआती समय के लिए मोराटोरियम (भुगतान में छूट) भी शामिल होगा। वहीं एयरलाइंस के लिए ऋण अवधि 7 साल तक हो सकती है, ताकि उन्हें वित्तीय स्थिरता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल कंपनियों को वित्तीय सहायता देना ही नहीं, बल्कि रोजगार बचाना और सप्लाई चेन को स्थिर रखना भी है। वैश्विक संकट के कारण कई उद्योगों पर असर पड़ा है, और यह योजना उन पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब बाहरी कारकों का प्रभाव बढ़ रहा है। एयरलाइंस को शामिल करने से यह योजना और व्यापक हो गई है, जिससे उन क्षेत्रों को भी राहत मिलेगी जो पहले सीधे तौर पर कवर नहीं थे।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका लाभ कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कंपनियों तक पहुंचता है। साथ ही, बैंकों की भागीदारी और क्रियान्वयन की गति भी अहम होगी।

कुल मिलाकर, ECLGS 5.0 सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने, उद्योगों को सहारा देने और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।

Summary

सरकार ने ECLGS 5.0 योजना को मंजूरी देकर एयरलाइंस सहित उद्योगों को राहत दी, जिससे ₹2.55 लाख करोड़ तक कर्ज उपलब्ध कराकर आर्थिक दबाव कम करने का प्रयास किया जाएगा।

Bharat Baani Bureau

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