12 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत के जाने-माने बैंकर और उद्योगपति Uday Kotak ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भारत को संभावित “बड़े झटके” के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और भारत की आर्थिक स्थिरता पर गहरा असर डाल सकता है।
CII Annual Business Summit 2026 में बोलते हुए कोटक ने कहा कि भारत लंबे समय से “comfort zone” में रहा है और अब समय आ गया है कि देश वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाए। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे आने वाले जोखिमों को हल्के में न लें।
Uday Kotak ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट और US-Iran तनाव को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो तेल कीमतों में तेज उछाल, सप्लाई चेन बाधाएं और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता भारत जैसी ऊर्जा-आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को “living beyond its means” यानी अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने वाली सोच से बचना होगा। कोटक के अनुसार, आर्थिक मजबूती के लिए देश को घरेलू विनिर्माण, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का सबसे सीधा असर तेल बाजार पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
Uday Kotak ने पहले भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों को लेकर कई बार चेतावनी दी है। उन्होंने हाल के महीनों में “नए औपनिवेशिक दौर” जैसी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि दुनिया में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत को अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी।
कोटक ने भारतीय उद्योगों से कहा कि वे केवल अल्पकालिक लाभ पर ध्यान न दें, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर काम करें। उनके मुताबिक, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च बेस ही भारत को भविष्य के वैश्विक झटकों से बचा सकता है।
इस बीच, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि US-Iran संघर्ष और बढ़ता है, तो वैश्विक शेयर बाजारों, मुद्रा बाजार और निवेश माहौल पर असर और गहरा हो सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आयात बिल और विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर हो सकती है।
कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत स्थिति में है, लेकिन बाहरी झटकों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसलिए सरकार और उद्योग जगत दोनों को सतर्क रहना होगा।
कुल मिलाकर, Uday Kotak की चेतावनी यह संकेत देती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अब केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
Summary
उदय कोटक ने US-Iran संघर्ष को भारत के लिए बड़ा आर्थिक खतरा बताते हुए कहा कि देश को तेल कीमतों और वैश्विक अस्थिरता से संभावित झटकों के लिए तैयार रहना चाहिए।
