25 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि United States, Iran के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर “जल्दबाजी” नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व युद्ध समाप्त करने की संभावित डील को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों, खासकर रिपब्लिकन नेताओं के बीच आलोचना बढ़ रही है।
Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि बातचीत “व्यवस्थित और रचनात्मक” तरीके से आगे बढ़ रही है, लेकिन उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि किसी भी समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप न दिया जाए। उन्होंने कहा कि “समय अमेरिका के पक्ष में है।”
रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित समझौते में Iran युद्ध को समाप्त करने, Strait of Hormuz को दोबारा खोलने और Iran के परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ताओं की रूपरेखा शामिल हो सकती है। हालांकि White House ने अभी तक समझौते की पूरी शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है।
Iran और अमेरिका के बीच तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ा हुआ है। फरवरी में शुरू हुए संघर्ष के बाद Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा।
Trump ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कोई औपचारिक, प्रमाणित और हस्ताक्षरित समझौता नहीं हो जाता।
इस बीच, संभावित डील को लेकर कई रिपब्लिकन नेताओं ने चिंता जताई है। अमेरिकी सीनेटर Roger Wicker, Ted Cruz और Lindsey Graham जैसे नेताओं ने आशंका व्यक्त की कि समझौता Iran को आर्थिक राहत दे सकता है, जबकि उसके परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त नियंत्रण सुनिश्चित नहीं हो पाएगा।
विश्लेषकों का कहना है कि Trump प्रशासन पर दो तरह का दबाव है — एक ओर युद्ध समाप्त करने और तेल आपूर्ति सामान्य करने की जरूरत, दूसरी ओर घरेलू राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, Iran को तेल बेचने की सीमित अनुमति और परमाणु वार्ताओं के लिए नया ढांचा शामिल हो सकता है। हालांकि इन शर्तों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वैश्विक बाजारों ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। संभावित डील की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट देखी गई क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि Strait of Hormuz दोबारा खुल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और Iran के बीच समझौता होता है, तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, सुरक्षा रणनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हालिया बयान यह संकेत देता है कि बातचीत अभी भी जटिल चरण में है और अंतिम समझौते में समय लग सकता है।
सोशल मीडिया और अमेरिकी राजनीतिक मंचों पर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग Trump की रणनीति को संतुलित बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे अनिश्चित और विरोधाभासी नीति कह रहे हैं।
Iran की ओर से भी संकेत मिले हैं कि दोनों पक्ष “framework agreement” के करीब पहुंच रहे हैं, लेकिन कई मुद्दों पर अभी मतभेद बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, Donald Trump का “जल्दबाजी नहीं” वाला बयान यह दर्शाता है कि अमेरिका Iran के साथ संभावित समझौते को लेकर सतर्क रणनीति अपनाना चाहता है। अब दुनिया की नजर इन वार्ताओं के अगले चरण और मध्य-पूर्व में स्थिरता की संभावनाओं पर टिकी हुई है।
