27 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के आगामी कार्यक्रम का विरोध किए जाने के बाद RSS ने पलटवार किया है। संगठन ने कहा कि न्यूयॉर्क में होने वाला ‘Universal Oneness Celebration’ खुले संवाद और आपसी सम्मान की भावना पर आधारित कार्यक्रम है और इसमें संगठन की विचारधारा को समझने में रुचि रखने वाले सभी लोगों का स्वागत है।
RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि न्यूयॉर्क का यह कार्यक्रम विविध, बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक दर्शकों के बीच संवाद का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने इसे भारतीय परंपरा के उस विचार से जोड़ा, जिसे संगठन समावेशी और सभी के लिए स्वागतपूर्ण बताता है।
आंबेकर ने कहा कि यह पहल खुले संवाद और पारस्परिक सम्मान की भावना से आयोजित की जा रही है। उनके अनुसार, RSS लंबे समय से भारत और दुनिया के अलग-अलग समुदायों के साथ संवाद और संपर्क की परंपरा का पालन करता रहा है। संगठन का दावा है कि इस तरह की पहल का उद्देश्य समझ और साझा उद्देश्यों को बढ़ावा देना है।
RSS ने अपने बयान में उन लोगों को भी कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया जो संगठन की विचारधारा, दृष्टिकोण और कामकाज को समझना चाहते हैं। यह प्रतिक्रिया ममदानी के उस बयान के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम का खुलकर विरोध किया था।
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने बुधवार को कहा था कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह एक निजी कार्यक्रम है और उन्हें इस बात को लेकर निश्चितता नहीं है कि शहर प्रशासन के पास इसे रद्द कराने का अधिकार है या नहीं।
ममदानी ने RSS की विचारधारा को लेकर अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे आंदोलन के बढ़ने को लेकर चिंता है, जिसे वह किसी देश की एक ‘बहिष्कारी’ दृष्टि से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो रंग, धर्म, आस्था या मूल स्थान की परवाह किए बिना हर व्यक्ति के अधिकार और अपनेपन में विश्वास करता है।
भागवत का यह कार्यक्रम 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित Madison Square Garden में आयोजित होने वाला है। यह कार्यक्रम ‘Universal Oneness Celebration’ के नाम से आयोजित किया जा रहा है और आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य साझा विरासत तथा विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और एकता को बढ़ावा देना है। भागवत इसमें लगभग 5,000 लोगों को संबोधित करने वाले हैं।
भागवत फिलहाल अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के दौरे पर हैं। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान संगठन के संदेश और विचारधारा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के प्रयास का हिस्सा है।
कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में भी मतभेद सामने आए हैं। Indian American Muslim Council, Interfaith Centre of New York और Hindus for Human Rights समेत कई संगठनों ने भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया है। इन संगठनों ने RSS की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं।
वहीं, RSS अपने संगठन को सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन बताते हुए इस तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना है।
विवाद के बीच अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने भी ममदानी के रुख की आलोचना की। उन्होंने भागवत के कार्यक्रम के समर्थन में कहा कि ‘Oneness’ का संदेश महत्वपूर्ण है और कार्यक्रम में धार्मिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर सार्थक संवाद की उम्मीद जताई।
इस मुद्दे पर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने ममदानी के बयान का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने उनके रुख की आलोचना की। इससे यह मामला भारतीय प्रवासी समुदाय और अमेरिकी राजनीतिक बहस के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
इस बीच, U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने भी भागवत की अमेरिका यात्रा के दौरान RSS से जुड़े मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी आरोपों को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS सदस्यों और कुछ भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की अपील की है। हालांकि, USCIRF की सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।
RSS ने फिलहाल विवाद का जवाब कार्यक्रम को ‘खुले संवाद’ और ‘समावेशी’ मंच के रूप में पेश करते हुए दिया है। संगठन का कहना है कि जो भी लोग RSS को समझना चाहते हैं, वे संवाद में शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच अब सबकी नजर 29 अगस्त को Madison Square Garden में होने वाले भागवत के कार्यक्रम पर है। यह कार्यक्रम RSS के वैश्विक आउटरीच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि ममदानी के विरोध और विभिन्न संगठनों की आपत्तियों ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है।
