1 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हमला करने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक ईरानी सेना पहले ही बुरी तरह कमजोर हो चुकी है। साथ ही ट्रंप ने दोहराया कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा।
सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रंप ने जवाब में सवाल को खारिज करते हुए कहा कि जब उनके अनुसार ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुका है, तो उस पर परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई औचित्य नहीं है।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद फिर से सीधे सैन्य हमले शुरू हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के Larak Island पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
ईरान को ‘फेल्ड नेशन’ बताया
ट्रंप ने ईरान को “failed nation” यानी विफल राष्ट्र बताते हुए दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने ईरान में भारी महंगाई, कमजोर मुद्रा और सैनिकों को भुगतान से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को गंभीर नुकसान हुआ है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका आगे कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर कार्रवाई कर सकता है।
‘ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा’
परमाणु हथियारों को लेकर ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। यह बयान अमेरिका की उस व्यापक नीति के अनुरूप है जिसमें वॉशिंगटन ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर लंबे समय से चिंता जताता रहा है।
हालांकि, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से पीछे हटने के बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ पारंपरिक सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रखने का संकेत दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं और आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। अमेरिका ने Larak Island पर कार्रवाई को Strait of Hormuz में संभावित समुद्री माइन बिछाने की ईरानी तैयारियों से जोड़कर देखा है। ईरान ने जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इस घटनाक्रम ने Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है और तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
मंगलवार को Brent crude करीब $91.54 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI करीब $87.03 प्रति बैरल पर रहा। बाजार में आशंका है कि अगर तनाव और बढ़ा तो खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
परमाणु विकल्प से दूरी, लेकिन सैन्य दबाव जारी
ट्रंप का परमाणु हमले से इनकार युद्ध के संभावित विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई की संभावना को खत्म नहीं किया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल पारंपरिक सैन्य हमलों और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए तेहरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार और सैन्य संसाधन मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे स्थानों से भी संसाधन हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को अमेरिका के लिए अपेक्षाकृत छोटा युद्ध बताते हुए व्यापक युद्ध की संभावना को कमतर आंकने की कोशिश की।
इस बीच, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव और Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
फिलहाल ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की उनकी योजना नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने तेहरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रखने का संकेत दिया है। इससे यह साफ है कि परमाणु हमले की संभावना को खारिज करने के बावजूद अमेरिका-ईरान संघर्ष का अंत अभी नजर नहीं आ रहा है
