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23 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। भारत के शीर्ष औषधि नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक के अनियंत्रित, बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी जारी की है। नियामक ने अनुचित दवा सेवन से होने वाली किडनी संबंधी जटिलताओं, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के जोखिम पर जोर दिया है।

21 सितंबर 2026 की सलाह में स्वास्थ्य पेशेवरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों, दवा विक्रेताओं और आम जनता से दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया है। CDSCO ने कहा है कि गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार, उचित खुराक और निर्धारित अवधि के लिए किया जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn724675search0″,”turn724675search3″,”turn724675search5”]}/>

बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचने की सलाह

CDSCO ने आम लोगों को दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक का खुद से इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी है। नियामक के अनुसार, इन दवाओं को बार-बार या लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय निगरानी के लेने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

दर्द, बुखार या अन्य लक्षण बने रहने अथवा दोबारा सामने आने पर लोगों को स्वयं दवा दोहराने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति को लिखी गई दवा लेना, बची हुई एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना या अपनी पुरानी पर्ची के आधार पर उपचार दोहराना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाता।

नियामक ने यह भी कहा है कि डॉक्टर की ओर से लिखी गई एंटीबायोटिक को निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही लेना चाहिए और उसे दूसरों के साथ साझा नहीं करना चाहिए। <Cite refs={[“turn724675search2″,”turn724675search9″,”turn724675search11”]}/>

NSAIDs से किडनी पर असर का जोखिम

NSAIDs ऐसी दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल दर्द, सूजन और कुछ अन्य स्थितियों में किया जाता है। इनका उपयोग सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द और अन्य तकलीफों में किया जा सकता है। हालांकि, इन दवाओं का अनुचित, बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।

कुछ NSAIDs किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर सकती हैं। इससे उन लोगों में जोखिम बढ़ सकता है जिनकी किडनी पहले से कमजोर है या जिन्हें निर्जलीकरण, हृदय संबंधी बीमारी अथवा अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं। लंबे समय तक या अनुचित उपयोग के मामलों में किडनी संबंधी जटिलताओं और क्रॉनिक किडनी डिजीज की आशंका को लेकर नियामक ने सावधानी बरतने को कहा है।

CDSCO ने विशेष रूप से किडनी की पहले से बीमारी वाले लोगों और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने के जोखिम वाले व्यक्तियों को NSAIDs लेने से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ को पूरी जानकारी देने की सलाह दी है। <Cite refs={[“turn724675search4″,”turn724675search5″,”turn724675search7”]}/>

कम से कम प्रभावी खुराक और उचित अवधि पर जोर

स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि NSAIDs लिखते समय मरीज की उम्र, मौजूदा बीमारियों, साथ में ली जा रही दवाओं और किडनी संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

नियामक ने विशेष रूप से उन मरीजों में सावधानी बरतने को कहा है जिन्हें किडनी की बीमारी, निर्जलीकरण, हृदय रोग या अन्य ऐसी स्थितियां हैं जो NSAIDs से जुड़े जोखिम को बढ़ा सकती हैं। चिकित्सकों को आवश्यक होने पर सबसे कम प्रभावी खुराक और सबसे कम उपयुक्त अवधि का चयन करने पर विचार करना चाहिए।

इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी दर्द निवारक दवाएं हर व्यक्ति के लिए प्रतिबंधित हैं। दवा का चुनाव मरीज की स्थिति, बीमारी, अन्य दवाओं और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाना चाहिए। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्धारित दवा की खुराक बदलने या उपचार बंद करने से बचना चाहिए।

एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बढ़ाता है AMR का खतरा

CDSCO ने एंटीबायोटिक के अनुचित इस्तेमाल से होने वाले एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR के खतरे पर भी जोर दिया है। जब बैक्टीरिया दवाओं के प्रभाव के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, तो संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है और उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

नियामक ने कहा है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल उन स्थितियों में नहीं किया जाना चाहिए जहां चिकित्सकीय रूप से इसकी जरूरत नहीं है। अधिकांश सामान्य वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होते, क्योंकि ये दवाएं बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती हैं, वायरस के खिलाफ नहीं।

डॉक्टरों को एंटीबायोटिक लिखते समय संक्रमण के संभावित कारण, प्रभावित अंग, बीमारी की गंभीरता और जरूरत पड़ने पर माइक्रोबायोलॉजिकल जांच तथा स्थानीय दवा-संवेदनशीलता के आंकड़ों पर विचार करने की सलाह दी गई है। अनावश्यक कॉम्बिनेशन थेरेपी, गलत एंटीबायोटिक का चयन, गलत खुराक और जरूरत से ज्यादा लंबी उपचार अवधि से बचने को कहा गया है। <Cite refs={[“turn724675search3″,”turn724675search5″,”turn724675search11”]}/>

फार्मेसियों और दवा विक्रेताओं की जिम्मेदारी

नियामक ने फार्मासिस्टों, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों को Schedule H, H1 तथा अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री से संबंधित वैधानिक प्रावधानों का पालन करने को कहा है।

सलाह के अनुसार, एंटीबायोटिक और प्रिस्क्रिप्शन-आधारित NSAIDs की बिक्री लागू नियमों के तहत पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ के प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार होनी चाहिए। दवा विक्रेताओं को मरीजों को खुद से दवा लेने के लिए प्रोत्साहित या सुविधा प्रदान नहीं करनी चाहिए।

दवाओं के लेबल पर दिए गए चेतावनी संदेशों और बिक्री संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। इसका उद्देश्य दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल को कम करना और मरीजों को संभावित दुष्प्रभावों से बचाना है। <Cite refs={[“turn724675search8″,”turn724675search9″,”turn724675search11”]}/>

अस्पतालों में प्रिस्क्रिप्शन की निगरानी मजबूत करने का आग्रह

CDSCO ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से NSAIDs और एंटीबायोटिक के तर्कसंगत इस्तेमाल के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का आग्रह किया है। इसमें प्रिस्क्रिप्शन की समीक्षा, मरीजों की उचित काउंसलिंग, दवा के इस्तेमाल की निगरानी और एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है।

एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सही मरीज, सही दवा, उचित खुराक और उचित अवधि के लिए किया जाए। इससे अनावश्यक दवा सेवन, प्रतिरोधी संक्रमण और दुष्प्रभावों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रण अधिकारियों को भी स्वास्थ्य पेशेवरों, फार्मासिस्टों, दवा विक्रेताओं और आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने तथा संबंधित कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

दवा नियामक की सलाह के बाद मरीजों को कुछ बुनियादी सावधानियां अपनानी चाहिए:

  • दर्द निवारक या एंटीबायोटिक बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार न लें।
  • डॉक्टर को अपनी किडनी, हृदय और अन्य बीमारियों की जानकारी दें।
  • पहले से ली जा रही सभी दवाओं की जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दें।
  • निर्धारित एंटीबायोटिक को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें।
  • बची हुई एंटीबायोटिक को भविष्य में स्वयं इस्तेमाल न करें।
  • दर्द, बुखार या अन्य लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
  • किडनी की बीमारी या निर्जलीकरण की स्थिति में NSAIDs लेने से पहले विशेष सावधानी बरतें।

जिम्मेदार दवा इस्तेमाल पर जोर

CDSCO की सलाह का मुख्य उद्देश्य दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक के सुरक्षित, तर्कसंगत और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि इन दवाओं का उपयोग चिकित्सकीय आवश्यकता, सही खुराक और उचित अवधि के अनुसार होना चाहिए।

दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक कई चिकित्सकीय परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन उनका गलत या अनावश्यक इस्तेमाल किडनी संबंधी जटिलताओं, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं और दवा-प्रतिरोध जैसे जोखिमों को बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर, फार्मासिस्ट, अस्पताल और मरीज—सभी की भूमिका दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।

Bharat Baani Bureau

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