24 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ जारी युद्ध में आत्मसमर्पण नहीं करेगा, लेकिन संघर्ष समाप्त करने के लिए कूटनीति में विश्वास रखता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान का बचाव किया था और समझौता नहीं होने पर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
पेजेश्कियान ने अपने संबोधन में अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ हमले करने का आरोप लगाया और कहा कि उनका देश अपनी रक्षा कर रहा है। उन्होंने ईरानी नागरिकों को हमलों का शिकार बताया तथा कहा कि धमकियों के जरिए ईरान को झुकाया नहीं जा सकता। उनके भाषण की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सभागार से बाहर चला गया। <Cite refs={[“turn747227news3″,”turn747227search14″,”turn747227search16”]}/>
आत्मसमर्पण से इनकार, बातचीत के लिए रास्ता खुला
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि तेहरान अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से कूटनीतिक प्रयासों में विश्वास रखता है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान सैन्य दबाव को स्वीकार किए बिना बातचीत के विकल्प को खुला रखना चाहता है।
रॉयटर्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष समाप्त करने के तौर-तरीकों को लेकर अब भी महत्वपूर्ण मतभेद हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच दूरी बनी हुई है, लेकिन कूटनीति जारी रहनी चाहिए। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, हालांकि तत्काल समझौते की राह आसान नहीं है। <Cite refs={[“turn747227news5″,”turn747227search10”]}/>
ट्रंप की चेतावनी का जवाब
पेजेश्कियान का संबोधन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण के एक दिन बाद हुआ। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका उसके खिलाफ और कठोर कदम उठा सकता है।
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामकता बताया है। पेजेश्कियान ने अपने भाषण में ईरान की रक्षा संबंधी स्थिति पर जोर दिया और कहा कि उनके देश के लोगों को हमलों का सामना करना पड़ा है। दोनों नेताओं के बयानों से यह पता चलता है कि युद्ध की राजनीतिक व्याख्या को लेकर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। <Cite refs={[“turn747227news24″,”turn747227search14″,”turn747227news7”]}/>
होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
पेजेश्कियान ने अपने संबोधन में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल होता था। संघर्ष के कारण यहां जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि सभी देश होर्मुज जलडमरूमध्य से लाभ उठाएं, जबकि ईरान को इस जलमार्ग के जरिए व्यापार और आवाजाही से वंचित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण नौसैनिक बेड़ों की स्थायी तैनाती और युद्ध का विस्तार शांति स्थापित नहीं कर सकता।
होर्मुज से जुड़ा विवाद केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। इस मार्ग में व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग लागत और ऊर्जा आयात पर असर पड़ सकता है। भारत सहित कई आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है। <Cite refs={[“turn747227news1″,”turn747227search9″,”turn747227news6”]}/>
ईरान की ओर से बातचीत की शर्तें
ईरानी अधिकारियों ने संघर्ष समाप्त करने के लिए कुछ शर्तों का संकेत दिया है। इनमें अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना और ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अवरोधों को हटाना शामिल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना को अमेरिकी कदमों से जोड़ा है।
ईरान की ओर से यह रुख कूटनीतिक संपर्क के लिए एक संभावित आधार प्रदान करता है, लेकिन दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर बना हुआ है। अमेरिका ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं पर नियंत्रण चाहता है, जबकि तेहरान सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों को कम करने की मांग कर रहा है। <Cite refs={[“turn747227news20″,”turn747227news19″,”turn747227news8”]}/>
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बाहर जाने से बढ़ा तनाव
पेजेश्कियान के भाषण की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सभागार से बाहर चले जाने की घटना ने दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव को उजागर किया। अमेरिकी मिशन ने तत्काल इस कदम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच आम तौर पर देशों को अपनी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय विवादों पर अपना पक्ष रखने का अवसर देता है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण इस बार ईरान और अमेरिका के संबोधनों के बीच टकराव स्पष्ट दिखाई दिया।
ईरान के राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अपने देश की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने का प्रयास किया। वहीं, अमेरिकी पक्ष ने युद्ध और ईरान के खिलाफ अपनी नीति को सुरक्षा तथा परमाणु प्रसार रोकने के तर्कों से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
आगे की राह अब भी कठिन
पेजेश्कियान के बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान सैन्य संघर्ष के बीच भी कूटनीतिक विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। हालांकि, बातचीत शुरू होने के लिए दोनों पक्षों को सैन्य कार्रवाई, प्रतिबंधों, होर्मुज जलडमरूमध्य और सुरक्षा गारंटी जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।
वर्तमान परिस्थितियों में किसी तत्काल शांति समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य तनाव जारी रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा पर अनिश्चितता बनी रह सकती है। आने वाले दिनों में मध्यस्थ देशों की भूमिका, होर्मुज में जहाजरानी की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ता महत्वपूर्ण घटनाक्रम होंगे।
