28 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): एशियाई खेलों 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। निशानेबाज ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया, जबकि ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किग्रा मुक्केबाजी वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक और पदक पक्का कर दिया।
ईशा का फाइनल बेहद रोमांचक रहा, जहां उन्हें चीन की जिआओ जियारुइशियान के खिलाफ लगातार शूट-ऑफ का सामना करना पड़ा। वहीं लवलीना ने दक्षिण कोरिया की सियोंग सुयोन को क्वार्टर फाइनल में 5-0 से हराकर लगातार दूसरे एशियाई खेलों में पदक सुनिश्चित किया।
पांच शूट-ऑफ के बाद ईशा को रजत
महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल फाइनल में ईशा सिंह ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया। स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला इतना कड़ा रहा कि दोनों निशानेबाजों के बीच कई शूट-ऑफ हुए। पांच शूट-ऑफ के बाद चीन की जिआओ जियारुइशियान ने बढ़त बनाकर स्वर्ण हासिल किया, जबकि ईशा सिंह को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
ईशा के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह इस स्पर्धा में विश्व स्तरीय प्रदर्शन के साथ एशियाई खेलों में पहुंची थीं। भारतीय निशानेबाज पिछले कुछ समय से 25 मीटर पिस्टल में लगातार मजबूत प्रदर्शन करती रही हैं। जुलाई में उन्होंने हांगझोउ में हुए ISSF विश्व कप में इसी स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी जीता था।
एशियाई खेलों से पहले ईशा को महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में विश्व नंबर एक बताया गया था और उनसे भारत को पदक की बड़ी उम्मीद थी।
टीम स्पर्धा में भारत पांचवें स्थान पर
ईशा के व्यक्तिगत पदक से पहले महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में भारत पदक से चूक गया था। ईशा सिंह, मनु भाकर और राही सरनोबत की भारतीय टीम 1727-56x के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रही।
चीन ने 1743-68x के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि दक्षिण कोरिया और चीनी ताइपे ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया।
हालांकि, टीम स्पर्धा में निराशा के बाद ईशा ने व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार वापसी करते हुए भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया।
लवलीना ने लगातार दूसरा एशियाई खेल पदक किया पक्का
मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में दक्षिण कोरिया की सियोंग सुयोन को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल में जीत के साथ लवलीना का कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित हो गया है।
यह एशियाई खेलों में लवलीना का लगातार दूसरा पदक होगा। इससे पहले हांगझोउ में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इस बार वह पदक का रंग बदलने के इरादे से रिंग में उतरी हैं।
टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना ने हाल ही में ग्लासगो में हुए 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भी 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था। अब एशियाई खेलों में उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक पर है।
सेमीफाइनल में स्वर्ण की चुनौती
क्वार्टर फाइनल में आसान जीत के बाद लवलीना के सामने अब सेमीफाइनल की चुनौती होगी। सेमीफाइनल में जीत उन्हें स्वर्ण पदक के मुकाबले तक पहुंचाएगी, जबकि हार की स्थिति में उन्हें कांस्य पदक मिलेगा।
लवलीना की मौजूदा एशियाई खेल यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पेरिस ओलंपिक के बाद अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर करने की कोशिश कर रही हैं। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक के बाद अब उनकी नजर एशियाई स्तर पर स्वर्ण पदक पर है।
भारत की पदक उम्मीदों को मजबूती
ईशा सिंह का रजत और लवलीना का सुनिश्चित पदक एशियाई खेलों में भारत के अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। खेलों के नौवें दिन भारत का ध्यान निशानेबाजी, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स समेत कई स्पर्धाओं पर था। दिन की शुरुआत भारत के 37 पदकों के साथ हुई थी।
मुक्केबाजी में लवलीना के अलावा प्रिय घंघास और कपिल पोखरिया के मुकाबले भी पदक की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे। वहीं निशानेबाजी में ईशा ने व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक हासिल कर भारतीय अभियान को मजबूती दी।
दबाव में प्रदर्शन ने बढ़ाया आत्मविश्वास
ईशा सिंह का रजत पदक खास तौर पर इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि फाइनल में उन्हें लगातार शूट-ऑफ के दबाव से गुजरना पड़ा। स्वर्ण से चूकने के बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय निशानेबाजी के लिए एक और महत्वपूर्ण पदक लेकर आया है।
दूसरी ओर, लवलीना की 5-0 की जीत ने उन्हें लगातार दूसरे एशियाई खेलों में पदक की दौड़ में बनाए रखा है। अब उनकी नजर सेमीफाइनल जीतकर स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह बनाने पर होगी।
एशियाई खेलों के आगे बढ़ने के साथ भारतीय खिलाड़ियों के सामने पदकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके रंग को बेहतर करने की चुनौती भी बनी हुई है। ईशा का रजत और लवलीना का सुनिश्चित पदक इस अभियान में भारत के लिए दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
