30 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पांच दिन, चार रेस और तीन पदक। भारतीय लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में जिस तरह का कार्यक्रम संभाला, वह अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। 25 से 29 सितंबर के बीच गुलवीर ने चार रेसों में हिस्सा लिया और तीन बार पोडियम पर जगह बनाई। उन्होंने 10,000 मीटर और 1,500 मीटर में रजत, जबकि 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता।
इस प्रदर्शन के साथ गुलवीर एक ही एशियन गेम्स में मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस स्पर्धाओं में तीन पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। 2023 के एशियन गेम्स में 10,000 मीटर में कांस्य जीतने वाले गुलवीर ने तीन साल के भीतर अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार दिखाया है।
25 सितंबर से शुरू हुआ पदकों का सिलसिला
गुलवीर का एशियाड अभियान 25 सितंबर को पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ से शुरू हुआ। इस स्पर्धा में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। इसके बाद 28 सितंबर को उन्हें 1,500 मीटर फाइनल में उतारना पड़ा, जबकि अगले ही दिन 5,000 मीटर का फाइनल था।
1,500 मीटर गुलवीर की मुख्य स्पर्धा नहीं मानी जाती और वह इस दूरी के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण भी नहीं लेते। इसके बावजूद उन्होंने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3:36.72 सेकंड का समय दर्ज किया और रजत पदक जीता। जापान के काजुतो इजावा ने 3:36.35 के समय के साथ स्वर्ण जीता। दोनों के बीच सिर्फ 0.37 सेकंड का अंतर रहा।
इसके बाद 29 सितंबर को गुलवीर ने पुरुषों की 5,000 मीटर फाइनल में हिस्सा लिया। यह उनकी पांच दिनों में चौथी रेस थी।
5,000 मीटर में कांस्य के साथ पूरी हुई हैट्रिक
लगातार रेसों के कारण गुलवीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती शरीर को रिकवर करने की थी। 5,000 मीटर फाइनल में उन्हें अपनी पूरी ऊर्जा बचाकर इस्तेमाल करनी थी। इसके बावजूद उन्होंने 13:32.75 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए कांस्य पदक जीता। बहरीन के बिरहानु बालेव ने 13:30.79 के समय के साथ स्वर्ण और जापान के तोमोनोरी यामागुची ने 13:31.43 के साथ रजत जीता।
यह कांस्य गुलवीर का एशियन गेम्स 2026 में तीसरा पदक था और इसके साथ उन्होंने एक ही संस्करण में तीन एथलेटिक्स पदक जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
रिकवरी बनी सबसे बड़ी चुनौती
गुलवीर के कोच स्कॉट सिमंस के अनुसार, इतनी कम अवधि में चार रेस दौड़ना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि गुलवीर ट्रेनिंग, जिम सेशन और रिकवरी को लेकर बेहद अनुशासित हैं। पोषण, नींद और रिकवरी को उनकी तैयारी का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जितना कठिन प्रशिक्षण को।
खुद गुलवीर ने बताया कि 1,500 मीटर की रेस के बाद उन्होंने मसाज, स्ट्रेचिंग और पर्याप्त आराम पर ध्यान दिया, क्योंकि अगले ही दिन 5,000 मीटर की रेस थी। उनके पास व्यक्तिगत फिजियो भी था, जिसने इस व्यस्त कार्यक्रम के दौरान रिकवरी में मदद की।
सिमंस ने कहा कि वह किसी एथलीट को पांच दिनों में चार रेस दौड़ाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन एशियन गेम्स में स्थिति अलग थी। 1,500 मीटर में उतरने का फैसला भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अनुरोध के बाद लिया गया था और टीम ने हर रेस के बीच रिकवरी को प्राथमिकता दी।
1,500 मीटर का पदक बना अतिरिक्त उपलब्धि
गुलवीर की तीन पदकों की उपलब्धि में 1,500 मीटर का रजत खास तौर पर उल्लेखनीय रहा। वह मुख्य रूप से लंबी दूरी की स्पर्धाओं के धावक हैं और इस दूरी के लिए उनका नियमित प्रशिक्षण नहीं होता।
इसके बावजूद उन्होंने 1,500 मीटर में अपनी गति का प्रभावी इस्तेमाल किया। कोच सिमंस के मुताबिक, इस रेस में मिला पदक उनके प्रशिक्षण का एक तरह से अतिरिक्त परिणाम था।
यही कारण है कि गुलवीर का प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है। अलग-अलग दूरी की रेसों के बीच तेजी से बदलाव करना और हर स्पर्धा में प्रतिस्पर्धी बने रहना उनके प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पहलू रहा।
कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद एशियाड में भी सफलता
गुलवीर की 2026 की सफलता एशियन गेम्स तक सीमित नहीं है। इससे पहले उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता था। इससे इस साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी निरंतरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उनके कोच का मानना है कि दुनिया के शीर्ष धावकों के साथ नियमित रूप से प्रतिस्पर्धा करने से गुलवीर की रेसिंग समझ और रणनीति में सुधार हुआ है। वह अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रशिक्षण लेते हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लेते रहे हैं।
सादगी और अनुशासन पर जोर
गुलवीर अपनी डाइट को लेकर भी काफी अनुशासित हैं। उन्होंने एशियन गेम्स के दौरान बताया कि वह पूरी तरह शाकाहारी हैं और चिकन तथा अंडे नहीं खाते। उनकी डाइट में दाल, रोटी, पनीर और पर्याप्त प्रोटीन शामिल रहता है। टीम उनके प्रोटीन और आयरन स्तर की भी निगरानी करती है।
उनकी तैयारी में सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं बल्कि नींद, पोषण, फिजियो सपोर्ट और रिकवरी भी शामिल है। पांच दिनों में चार रेस पूरी करने के बाद तीन पदक जीतना इसी व्यापक तैयारी का परिणाम रहा।
अब नजर विश्व चैंपियनशिप और लॉस एंजिलिस पर
एशियन गेम्स की सफलता के बाद गुलवीर के सामने अगले बड़े लक्ष्य भी हैं। कोच स्कॉट सिमंस ने विश्व चैंपियनशिप और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों को आगे की प्राथमिकताओं में बताया है।
एशियन गेम्स में तीन पदक जीतकर गुलवीर ने भारतीय दूरी की दौड़ में अपनी जगह और मजबूत की है। 10,000 मीटर का रजत, 1,500 मीटर का रजत और 5,000 मीटर का कांस्य—इन तीनों के बीच सिर्फ पदकों की संख्या नहीं, बल्कि एक कठिन पांच दिन की कहानी भी छिपी है।
पांच दिनों में चार रेस दौड़ने के बाद तीन पदक जीतना गुलवीर सिंह के लिए थकाऊ जरूर रहा, लेकिन एशियन गेम्स 2026 में यह अभियान भारतीय एथलेटिक्स की सबसे उल्लेखनीय व्यक्तिगत उपलब्धियों में शामिल हो गया।
