14 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो : त्योहारों के मौसम में डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों और कारोबारियों को राहत देते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI लेवी लागू करने की प्रक्रिया को दिवाली तक टाल दिया है। इस फैसले से भुगतान व्यवस्था से जुड़े कारोबारियों और सेवा प्रदाताओं को नई व्यवस्था के लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस भारत में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के लेनदेन में व्यापक रूप से किया जाता है। त्योहारों के दौरान खरीदारी और ऑनलाइन भुगतान बढ़ने के कारण UPI से जुड़े किसी भी शुल्क या नियम में बदलाव का असर बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों पर पड़ सकता है।
₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क
NPCI ने 13 अक्टूबर को घोषणा की कि चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने की योजना थी। नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, पात्र ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की योजना है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति लेनदेन ₹300 बताई गई है। यह शुल्क व्यापारियों से संबंधित है; इसे सीधे ग्राहकों पर लागू होने वाला UPI भुगतान शुल्क समझना सही नहीं होगा।
फैसले को क्यों टाला गया?
त्योहारी सीजन में खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में शुल्क व्यवस्था में बदलाव से व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को तकनीकी तैयारी, सिस्टम अपडेट और प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ सकती है। व्यापारी संगठनों ने भी नई व्यवस्था लागू करने के समय को लेकर चिंता जताई थी।
क्या आम UPI उपयोगकर्ताओं को शुल्क देना होगा?
सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि ग्राहकों से UPI भुगतान करने के लिए सीधे लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान मुफ्त रहेंगे। प्रस्तावित MDR चुनिंदा व्यापारी लेनदेन से संबंधित है; इसकी अंतिम लागू तारीख और पात्र श्रेणियों के बारे में आगे की अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी
