16 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान और 1983 विश्व कप विजेता टीम के नायक कपिल देव ने देश में गोल्फ को अधिक लोकप्रिय बनाने और दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी पहचान दिलाने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि भारत में क्रिकेट को मिलने वाली लोकप्रियता और शोहरत के साथ-साथ गोल्फ जैसे खेलों को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने और सम्मान हासिल करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
कपिल देव इस समय प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (PGTI) के अध्यक्ष के रूप में भारतीय गोल्फ के विकास से जुड़े हैं। क्रिकेट के मैदान पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करने के बाद अब वह गोल्फ के लिए बेहतर अवसर, सुविधाएं और पहचान बनाने पर काम कर रहे हैं।
क्रिकेट से आगे दूसरे खेलों को भी मिले पहचान
कपिल देव का मानना है कि भारत में खेलों को लेकर लोगों की दिलचस्पी केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्रिकेटरों को मिलने वाली लोकप्रियता के मुकाबले दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन, आर्थिक अवसर और सार्वजनिक पहचान मिलना जरूरी है।
उनके अनुसार, किसी खेल को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का होना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अभ्यास की सुविधाएं, प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर और अपने प्रदर्शन को लोगों तक पहुंचाने के लिए बेहतर मंच भी चाहिए। गोल्फ में इन पहलुओं को मजबूत करना भारतीय खिलाड़ियों के विकास के लिए अहम हो सकता है।
गोल्फ के लिए बेहतर सुविधाओं की जरूरत
कपिल देव ने गोल्फ के विस्तार में बुनियादी ढांचे की अहमियत पर भी जोर दिया है। उनका मानना है कि यदि युवा खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतिस्पर्धा के बेहतर अवसर नहीं मिलेंगे, तो उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
गोल्फ को अक्सर महंगा खेल माना जाता है। हालांकि, कपिल देव पहले भी इस धारणा पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा है कि शुरुआती स्तर पर गोल्फ सीखने के लिए सीमित उपकरणों से भी शुरुआत की जा सकती है। भारतीय गोल्फ में ऐसे खिलाड़ी भी रहे हैं जिन्होंने कैडी के रूप में काम करते हुए खेल सीखा और बाद में पेशेवर स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
युवाओं को खेल अपनाने का अवसर मिले
भारत में खेल प्रतिभा को आगे लाने के लिए शुरुआती स्तर पर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। कपिल देव की सोच है कि युवाओं को केवल लोकप्रिय खेलों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अलग-अलग खेलों को आजमाने और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
गोल्फ के विस्तार के लिए अधिक प्रशिक्षण सुविधाएं, प्रतियोगिताएं, प्रायोजन और दर्शकों के बीच जागरूकता मददगार हो सकते हैं। इससे खिलाड़ियों को पेशेवर करियर बनाने की संभावना मिलेगी और खेल से जुड़े संगठनों को भी नई प्रतिभाओं की पहचान करने में आसानी होगी।
कपिल देव की नई भूमिका
1983 में भारत को पहला क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव की पहचान लंबे समय तक क्रिकेट से जुड़ी रही है। अब वह गोल्फ प्रशासन और उसके विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए यह भूमिका केवल एक नए खेल से जुड़ना नहीं, बल्कि भारतीय खेल जगत में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है।
उनका संदेश स्पष्ट है: भारत में खेलों की सफलता का आकलन केवल क्रिकेट की लोकप्रियता से नहीं होना चाहिए। गोल्फ सहित अन्य खेलों के खिलाड़ियों को भी सुविधाएं, अवसर और पहचान मिलनी चाहिए, ताकि वे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखा सकें।
