22 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने गुजरात के जामनगर स्थित कंपनी की विशाल रिफाइनरी परिसर में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेजबानी की। यह मुलाकात भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा, उद्योग और रणनीतिक सहयोग को लेकर बढ़ती बातचीत के बीच हुई है।
रूबियो की जामनगर यात्रा के दौरान रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें रिफाइनरी परिसर और कंपनी की ऊर्जा तथा पेट्रोकेमिकल गतिविधियों से अवगत कराया। दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसरों में शामिल जामनगर कॉम्प्लेक्स रिलायंस के ऊर्जा कारोबार का प्रमुख केंद्र है।
जामनगर रिफाइनरी का किया दौरा
रिलायंस का जामनगर परिसर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है और इसमें बड़े पैमाने पर कच्चे तेल को विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने की क्षमता है। परिसर में दो प्रमुख रिफाइनरियां हैं और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में रिलायंस की महत्वपूर्ण मौजूदगी का आधार है।
रूबियो के दौरे के दौरान उन्हें रिफाइनिंग संचालन, पेट्रोकेमिकल उत्पादन और कंपनी की विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। यात्रा को भारत की औद्योगिक क्षमता और निजी क्षेत्र की ऊर्जा क्षेत्र में भूमिका को समझने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण
मार्को रूबियो की जामनगर यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों का व्यापार बढ़ा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना और भरोसेमंद वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिका भी भारत को एक महत्वपूर्ण ऊर्जा बाजार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का दायरा तेल और गैस से आगे बढ़कर स्वच्छ ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और नई तकनीकों तक पहुंच चुका है।
रिलायंस की वैश्विक भूमिका
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स के अलावा डिजिटल सेवाओं, खुदरा कारोबार और नई ऊर्जा तक फैला हुआ है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में न्यू एनर्जी क्षेत्र में बड़े निवेश की योजनाएं भी आगे बढ़ाई हैं।
जामनगर परिसर में नई ऊर्जा से जुड़े उत्पादन और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे कंपनी की रणनीति पारंपरिक ऊर्जा कारोबार के साथ भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की है।
मुकेश अंबानी और अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के बीच संवाद को भारत-अमेरिका कारोबारी संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों की कंपनियों के बीच निवेश और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
रणनीतिक संबंधों के बीच उद्योग की भूमिका
रूबियो की भारत यात्रा व्यापक भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में हो रही है। व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
ऐसे में जामनगर रिफाइनरी का दौरा अमेरिकी अधिकारी के लिए भारत की औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा क्षेत्र की ताकत को करीब से देखने का अवसर भी माना जा सकता है।
मुकेश अंबानी की ओर से रूबियो की मेजबानी इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारत-अमेरिका संबंधों में निजी क्षेत्र और बड़े उद्योग समूहों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत कर सकता है।
फिलहाल रूबियो की जामनगर यात्रा को भारत की ऊर्जा क्षमता, रिलायंस के वैश्विक कारोबार और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के बीच बढ़ते संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
