22 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के उत्तराखंड में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर हुए विवाद के बाद मामला लगातार चर्चा में है। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने रुख पर कायम रहते हुए सवाल उठाया है कि अगर दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्होंने कार्यक्रम करने की सहमति क्यों दी। अपने पक्ष में मंत्री ने पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा का उदाहरण दिया, जिन्होंने बीमारी के कारण कार्यक्रम में शामिल न हो पाने पर आयोजकों को पूरी फीस वापस कर दी थी।
मंत्री के अनुसार, सुनंदा शर्मा को उत्तराखंड के नरेंद्रनगर क्षेत्र में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले में प्रस्तुति देनी थी। लेकिन उनकी तबीयत खराब हो गई, जिसके कारण वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं। उनियाल ने बताया कि सुनंदा शर्मा ने आयोजकों से प्राप्त पूरी राशि लौटा दी थी। इसके बाद दलेर मेहंदी को कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया।
35 लाख रुपये भुगतान का दावा
मंत्री सुबोध उनियाल ने दावा किया कि दलेर मेहंदी को कार्यक्रम के लिए करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा उनके आने-जाने, टिकट और होटल सहित अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च किया गया था। मंत्री के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान गायक अपेक्षित ढंग से प्रस्तुति नहीं दे पा रहे थे और उन्हें लिप-सिंकिंग करते हुए देखा गया।
उनियाल ने कहा कि अगर कोई कलाकार अस्वस्थ है और अपनी सामान्य प्रस्तुति देने की स्थिति में नहीं है, तो उसे आयोजकों को पहले ही इसकी जानकारी देनी चाहिए। उनके अनुसार, दर्शकों को कलाकार की बीमारी के बारे में स्वतः जानकारी नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आपत्ति दलेर मेहंदी के प्रति व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि कार्यक्रम की गुणवत्ता और दर्शकों की अपेक्षाओं से जुड़ी थी।
मंच पर टोकने से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान मंत्री मंच पर पहुंचे और गायक के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में उनियाल को यह पूछते हुए देखा गया कि जब गायक ठीक से बोल नहीं पा रहे, तो गाना कैसे गाएंगे। इस दौरान उन्होंने प्रस्तुति और भुगतान को लेकर भी नाराजगी जताई।
घटना के वीडियो सामने आने के बाद मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने दलेर मेहंदी का समर्थन किया। गायक मीका सिंह, बादशाह, कपिल शर्मा और अन्य कलाकारों ने सार्वजनिक मंच पर इस तरह टोकने के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कलाकार की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब उसकी तबीयत ठीक न हो।
मीका सिंह ने बीमारी और दवाओं का दिया हवाला
मीका सिंह ने दलेर मेहंदी के समर्थन में कहा कि उनके भाई की तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं थी और उनकी हाल ही में बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मीका ने उन आरोपों पर आपत्ति जताई जिनमें दलेर मेहंदी के नशे में होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि बीमारी या दवाओं के प्रभाव के कारण प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है और बिना पुष्टि के शराब के सेवन का आरोप लगाना उचित नहीं है।
दूसरी ओर, मंत्री उनियाल ने कहा कि उन्हें दलेर मेहंदी की बीमारी के बारे में कार्यक्रम से पहले जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कलाकार अस्वस्थ थे, तो उन्हें कार्यक्रम में आने से पहले आयोजकों को सूचित करना चाहिए था। इस मामले में किसी मेडिकल जांच से नशे संबंधी आरोपों की पुष्टि होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मंत्री के आरोपों और गायक के स्वास्थ्य को लेकर उनके समर्थकों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कलाकार के सम्मान और जवाबदेही पर बहस
इस विवाद ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में कलाकारों की जिम्मेदारी और उनके सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है। एक पक्ष का कहना है कि आयोजकों और दर्शकों को भुगतान के अनुरूप प्रस्तुति की अपेक्षा करने का अधिकार है। वहीं, दूसरे पक्ष का तर्क है कि कलाकार की तबीयत खराब होने की स्थिति में संवेदनशीलता और गरिमा बनाए रखना भी जरूरी है।
सुनंदा शर्मा का उदाहरण देते हुए मंत्री ने अपनी बात रखी है कि बीमारी के कारण कार्यक्रम में शामिल न हो पाने पर फीस लौटाना भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, दलेर मेहंदी के मामले में उनकी टीम की ओर से बीमारी और हालिया सर्जरी का हवाला दिया गया है। ऐसे में पूरे विवाद का निष्कर्ष निकालने से पहले दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।
