12 दिसंबर 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : बांग्लादेश में सत्ता बदलने के बाद जो आरोप सबसे ज्यादा गूंज रहे थे वह यह कि शेख हसीना को गिराने में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू साजिश थी. लेकिन अब शेख हसीना के तख्तापलट को मोहम्मद यूनुस जायज ठहराना चाहते हैं. बांग्लादेश में चुनावी घोषणा से माना जा रहा है कि ये सरकार बनाने से ज्यादा तख्तापलट को सही साबित करने का प्लान है. अंतरिम सरकार ने ऐलान किया है कि 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में चुनाव भी होगा और उसी दिन संविधान बदलने वाले ‘जुलाई चार्टर’ पर देशव्यापी जनमतसंग्रह यानी रेफरेंडम भी कराया जाएगा. अब इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर यूनुस सरकार चुनाव और रेफरेंडम एक साथ क्यों कराना चाहती है?

बांग्लादेश में क्या संविधन बदलने की तैयारी?

5 अगस्त 2025 को शेख हसीना की सरकार को हटे एक साल पूरा होने पर ही मोहम्मद यूनुस ने संकेत दिया था कि चुनाव फरवरी 2026 में होंगे. अब तारीखें भी तय हो गईं और इसके साथ ही एक बड़ा राजनीतिक प्रयोग भी जोड़ दिया गया. जुलाई चार्टर, जिसे 25 से ज्यादा पार्टियों ने साइन किया है. यह चार्टर 1972 के बांग्लादेश संविधान में बड़े बदलाव करने की बात करता है. अगर जुलाई चार्टर लागू हुआ तो बड़े पैमाने पर बांग्लादेश में राजनीतिक शक्तियों का बंटवारा होगा.

बांग्लादेश के जुलाई चार्टर में क्या प्रस्ताव हैं?

  • ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के दौरान केयरटेकर सरकार, इलेक्शन कमीशन और अन्य संवैधानिक संस्थाएं जुलाई चार्टर के मॉडल पर बनेंगी.
  • संसद दो सदनों वाली होगी. ऊपरी सदन में 100 सीटें होंगी. किसी भी संवैधानिक बदलावों पर अंतिम मंजूरी वही देगा.
  • जीतने वाले दलों को जुलाई चार्टर के 30 सर्वसम्मत बिंदुओं को लागू करना होगा. जिनमें महिलाओं के लिए बढ़ा हुआ प्रतिनिधित्व, विपक्ष का डिप्टी स्पीकर, प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर सीमाएं, राष्ट्रपति की शक्तियों में वृद्धि, मौलिक अधिकारों का विस्तार और न्यायिक और स्थानीय सरकार की स्वतंत्रता को मजबूत करना शामिल है. भविष्य में कोई भी प्रधानमंत्री ‘अत्यधिक शक्तिशाली’ न बन सके, इसके लिए चेक एंड बैलेंस की नई व्यवस्था लाई जाएगी.
  • चार्टर के अन्य वादों को भी लागू करना होगा.

बांग्लादेश रेफरेंडम को लेकर क्या है विवाद?

यूनुस ने जब रेफरेंडम का ऐलान किया, तभी से विवाद बढ़ गया. दरअसल जनता से चार अलग-अलग सुधारों पर राय ली जाएगी. पहले माना जा रहा था कि चारों सुधारों के लिए ‘हां’ और ‘न’ का अलग-अलग विकल्प होगा. लेकिन अब साफ है कि सवाल तो चार पूछे जाएंगे लेकिन विक्लप एक ही रहेगा. यानी एक मतदाता सभी सुधारों को हां कह सकता है या फिर सभी सुधारों को नकारेगा.

जुलाई चार्टर के विरोध में क्या तर्क हैं?

नवंबर में पत्रकार अमीन अल राशिद ने इसे ‘खामी भरा ढांचा’ कहा. उनका सवाल बिल्कुल सीधा है. ‘अगर कोई 2 सुधारों के पक्ष में है और 2 के खिलाफ? वह कैसे वोट करेगा? बैलेट पर एक साथ YES और NO तो नहीं लिख सकता.’ वह यह भी कहते हैं कि ज्यादातर लोग जुलाई चार्टर को जानते ही नहीं, न पढ़ा है न समझा है. उन्होंने कहा, ‘क्या एक किसान या रिक्शा चालक अचानक इतना बड़ा राजनीतिक दस्तावेज पढ़ेगा? किसने जाकर इसे समझाया?’
बिप्लोबी वर्कर्स पार्टी के प्रमुख सैफुल हक कहते हैं, ‘इतने गंभीर संवैधानिक सवालों का जवाब सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ से नहीं दिया जा सकता. इससे सरकार का संकट जनता पर ढकेल दिया गया है.’ कई दलों ने पहले ही कहा था कि रेफरेंडम चुनाव से पहले होना चाहिए, लेकिन यूनुस प्रशासन दोनों को एक साथ करा रहा है. आम जनता पूरी तरह भ्रमित है और प्रचार अभी तक शुरू नहीं. रेफरेंडम की तारीख बहुत पास है, लेकिन चार्टर को लेकर जागरूकता लगभग शून्य है. लोग अखबारों और टीवी में इसका नाम तो सुन रहे हैं, पर असल में इसमें क्या लिखा है. बहुतों को पता ही नहीं.

शेख हसीना की पार्टी क्या बोली?

शेख हसीना की अवामी लीग, जो इस समय प्रतिबंधित है, ने चुनाव कार्यक्रम को ‘गैरकानूनी, फासीवादी और पक्षपाती’ कहकर खारिज कर दिया है. पार्टी का कहना है कि सरकार जानबूझकर हमें बाहर रखकर चुनाव कराना चाहती है. पार्टी ने मांग की है कि शेख हसीना पर लगे सभी ‘फर्जी केस’ हटाए जाएं. राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए और एक निष्पक्ष केयरटेकर सरकार चुनाव कराये. अवामी लीग का सबसे बड़ा आरोप यही है कि यूनुस सरकार हसीना को पूरी तरह राजनीतिक रूप से खत्म करने का प्लान चला रही है, ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि हसीना की जगह लिया गया फैसला सही था.

राष्ट्रपति ने किया इस्तीफे का ऐलान

हसीना के शासनकाल में चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने भी कहा है कि यूनुस सरकार ने ‘उन्हें अपमानित और किनारे कर दिया’. वह फरवरी चुनाव के बाद इस्तीफा दे देंगे. अगर जुलाई चार्टर पास होता है, तो राष्ट्रपति का पद बेहद शक्तिशाली बन जाएगा, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि किसके हाथ में असली सत्ता जाएगी?

सारांश:
मोहम्मद यूनुस ने चुनाव के साथ रेफरेंडम कराने की योजना बनाई है, जिससे शेख हसीना के खिलाफ षड्यंत्र को साबित करने की कोशिश की जा रही है। यह कदम राजनीतिक विवाद और असंतोष को बढ़ा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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