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04फ़रवरी2026 (भारत बानी ब्यूरो) : कैंसर का पता जितनी जल्दी चल जाए इलाज से बचने की संभावना उतनी बढ़ जाती है। इसलिए कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट बहुत जरूरी हैं। समय समय पर आपको कैंसर की कुछ जांच कराते रहना चाहिए। क्योंकि लक्षणों के आने से पहले कैंसर का पता लगने से शरीर में कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन सा टेस्ट कराने से कैंसर होने के खतरे का पता लगाया जा सकता है।

डॉक्टर वैशाली जामरे (डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और हेड, ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत) की मानें तो ऐसा कोई एक टेस्ट नहीं है जिससे पता लग जाए कि कैंसर का खतरा है। आपको अलग-अलग कैंसर की जांच के लिए अलग टेस्ट कराने की जरूरत होती है। कोई एक पूरे शरीर का कैंसर टेस्ट नहीं होता, जो सबके लिए सही हो। कैंसर की जांच व्यक्ति की उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और जोखिम पर निर्भर करती है।

कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट, जिससे कैंसर का पता चलता है

  • मेमोग्राफी- स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान (आमतौर पर 40 साल के बाद, या हाई-रिस्क में पहले)
  • पैप स्मीयर + HPV टेस्ट-  सर्वाइकल कैंसर की जांच
  • कोलोनोस्कोपी / स्टूल टेस्ट (FIT)-  बड़ी आंत के कैंसर के लिए
  • ओरल एग्ज़ामिनेशन- तंबाकू लेने वालों में मुंह के कैंसर के लिए
  • लो-डोज CT- भारी धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग
  • जेनेटिक काउंसलिंग/टेस्टिंग- अगर परिवार में कम उम्र में बार-बार कैंसर हुआ हो

क्या ब्लड टेस्ट से कैंसर का पता चल सकता है?

कैंसर का पता लगाने के लिए टोटल ब्लड काउंट (सीबीसी)- हालांकि सीबीसी अक्सर नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा होता है, लेकिन इस मामले में डॉक्टर इसका उपयोग रक्त कोशिकाओं की असामान्य रूप से उच्च या निम्न संख्या की जांच करने के लिए करते हैं, जो ल्यूकेमिया जैसे कुछ कैंसर का संकेत हो सकता है।

ट्यूमर मार्कर- इस टेस्ट में खून में उन पदार्थों की पहचान की जाती है जिनका संबंध कैंसर से हो सकता है। ट्यूमर मार्कर कैंसर कोशिकाओं से या कैंसर के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया स्वरूप उत्पन्न हो सकते हैं। 

सर्क्युलेटिंग ट्यूमर सेल्स टेस्ट- यह टेस्ट उन कैंसर कोशिकाओं की जांच करता है जो ट्यूमर से अलग होकर ब्लड फ्लो में घूम रही हैं। इसका उपयोग अक्सर स्तन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर की निगरानी के लिए किया जाता है।

ब्लड प्रोटीन टेस्ट- ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे कुछ कैंसर रक्त में प्रोटीन के स्तर में असामान्यता पैदा कर सकते हैं। यह परीक्षण इन अनियमितताओं का पता लगाने में सहायक होता है।

सारांश:

कैंसर के जोखिम को समय रहते पहचानने के लिए सही टेस्ट कराना जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि कौन-कौन से जांच विकल्प उपलब्ध हैं और कैसे नियमित जांच से बीमारी को पहले चरण में ही रोक या नियंत्रित किया जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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