10 फ़रवरी2026 (भारत बानी ब्यूरो) : सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका लिखने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। परीक्षार्थी अब अपनी मर्जी से कहीं भी किसी भी सवाल का जवाब नहीं लिख सकेंगे। विज्ञान के पेपर में अगर फिजिक्स का उत्तर कैमिस्ट्री के लिए तय सैक्शन में लिख दिया गया तो वह उत्तर सही होने के बावजूद जांचा नहीं जाएगा और उसके जीरो अंक मिलेंगे। 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होने वाली हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल और सटीक बनाने के लिए बोर्ड ने 10वीं कक्षा के 2 मुख्य विषयों विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लिए यह सख्त गाइडलाइन जारी की है।

एक सैक्शन के उत्तर एक साथ लिखना अनिवार्य

विज्ञान की उत्तर पुस्तिका को 3 स्पष्ट भागों में बांटना होगा। पहले सेक्शन ‘ए’ में बायोलॉजी, ‘बी’ में कैमिस्ट्री और ‘सी’ में फिजिक्स के उत्तर लिखने होंगे। इसी तरह सामाजिक विज्ञान को 4 भागों—इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में बांटा गया है। विद्यार्थियों को एक साथ एक पूरा सैक्शन ही हल करना होगा। शिक्षाविद् बताते हैं कि छात्र किसी एक सैक्शन के भीतर प्रश्नों के जवाब अपनी सुविधा से आगे-पीछे दे सकते हैं लेकिन एक सैक्शन के बीच दूसरे सैक्शन का कोई भी जवाब नहीं लिख सकेंगे। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे उत्तर पुस्तिका मिलते ही पहले पेज प्लानिंग करें और एक विषय खत्म होने के बाद अगले विषय के लिए नए पेज का इस्तेमाल करें।

डिजिटल इवैल्यूएशन में गलत सैक्शन के उत्तर नहीं होंगे शो

सी.बी.एस.ई. के नए डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम के तहत गलत सैक्शन में लिखे उत्तरों पर री-इवैल्यूएशन या वैरिफिकेशन के दौरान विचार नहीं किया जाएगा। जब उत्तर सही मैपिंग या निर्धारित स्थान पर नहीं होगा तो वह परीक्षक की स्क्रीन पर प्रदर्शित ही नहीं होगा। वैरिफिकेशन प्रक्रिया में केवल अंकों की गणना होती है, इसलिए सिस्टम गलत स्थान पर लिखे उत्तर को इनवैलिड मानेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अब कॉपियों की डिजिटल चैकिंग की जा रही है जहां हर विषय का विशेषज्ञ केवल अपने सैक्शन की ही जांच करेगा। अगर उत्तर गलत सैक्शन में है तो वह सॉफ्टवेयर या परीक्षक की स्क्रीन पर दिखाई ही नहीं देगा।

प्रैक्टिकल परीक्षाओं पर भी डिजिटल पहरा 

बोर्ड ने थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए भी रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की है। हर स्कूल को प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के साथ इंटरनल और एक्सटर्नल एग्जामिनर का एक जियो-टैग्ड ग्रुप फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। इस फोटो के बगैर स्कूलों के प्रैक्टिकल अंक पोर्टल पर अपलोड नहीं होंगे। फोटो अपलोड करते समय मोबाइल की लोकेशन और समय का मिलान किया जाएगा। 15 मिनट के रीडिंग टाइम का महत्व अब और बढ़ गया है क्योंकि छात्रों को सही सेक्शन का चुनाव सावधानी से करना होगा।

सारांश:
CBSE ने बोर्ड परीक्षा में आंसर शीट भरने के लिए नया डिजिटल नियम लागू किया है। इसके तहत विद्यार्थी सही जवाब देने के बावजूद यदि आंसर शीट सही तरीके से भरी नहीं होगी, तो उन्हें अंक नहीं मिल सकते और ‘जीरो’ भी दिया जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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