25 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश की अदालतों में जनहित याचिकाओं (PIL) की “मशरूम ग्रोथ” यानी अनियंत्रित बढ़ोतरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि कुछ “प्रमुख चेहरों” का एकमात्र एजेंडा सुबह अखबार पढ़ना और शाम तक उस पर याचिका दायर कर देना रह गया है।”खबरों के आधार पर अदालत का रुख”
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाओं की गुणवत्ता और उनके पीछे के उद्देश्यों पर सवाल उठाए। CJI ने कहा कि अब ऐसे नामचीन लोग सामने आ रहे हैं जो बिना किसी जमीनी शोध के सिर्फ खबरों के आधार पर अदालत का रुख करते हैं। शीर्ष अदालत ने माना कि ऐसी याचिकाओं के कारण अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है, जिसे वास्तव में जरूरतमंद लोगों और गंभीर कानूनी मुद्दों पर खर्च किया जाना चाहिए। यह भी चिंता जताई गई कि कई बार इन याचिकाओं का उद्देश्य जनहित के बजाय विकास परियोजनाओं को रोकना होता है।
पहले भी कोर्ट ने की है टिप्पणी
इससे पहले 2022 के एक फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (प्रसिद्धि पाने के लिए की गई मुकदमेबाजी) की तेजी से बढ़ती संख्या को लेकर टिप्पणी की थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने था, “हालांकि, ऐसी कई याचिकाओं में कोई वास्तविक जनहित शामिल नहीं होता है। ये याचिकाएं या तो ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ होती हैं या फिर ‘पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (निजी स्वार्थ के लिए की गई मुकदमेबाजी)। हम ऐसी निरर्थक याचिकाएं दायर करने के इस तरीके की कड़ी निंदा करते हैं। यह कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं है। ऐसी याचिकाएं अदालत के उस कीमती समय को बर्बाद करती हैं, जिसका उपयोग वास्तविक और गंभीर मुद्दों पर विचार करने के लिए किया जा सकता था। अब समय आ गया है कि ऐसी तथाकथित जनहित याचिकाओं को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाए, ताकि बड़े जनहित में चल रहे विकास कार्य न रुकें।
सारांश:
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने कुछ ‘नामचीन चेहरों’ के कथित एजेंडे पर नाराज़गी जताई। उन्होंने टिप्पणी की कि सुबह अखबार में खबर पढ़कर उसी आधार पर शाम तक याचिका दायर कर दी जाती है। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल प्रचार या निजी एजेंडे के लिए नहीं होना
