05 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। बढ़ते तनाव के बीच निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। गुरुवार को सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह करीब 5,170 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
दरअसल अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी मिसाइल हमलों से क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। यह टकराव अब छठे दिन में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया, जबकि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों को खारिज कर दिया है।
सोने पर दो तरफा दबाव
वेंचुरा के कमोडिटी हेड एन.एस. रामास्वामी के अनुसार इस समय सोने की कीमतों पर दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं। एक ओर भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मजबूत डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड जैसे आर्थिक कारक सोने की तेजी को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतिहास बताता है कि जब भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना अक्सर मजबूत बना रहता है, भले ही ब्याज दरें ऊंची क्यों न हों।
केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे सोने का भंडार
रामास्वामी के मुताबिक कई देशों के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने सोने के भंडार लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका में बढ़ता राजकोषीय घाटा भी लंबे समय में सोने की कीमतों को सहारा दे सकता है। उनका मानना है कि 5,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए मजबूत आधार बन सकता है।
सारांश:
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि Geopolitical तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्ति की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ी है। एक्सपर्टों ने अप्रैल के बाद सोने के भाव के लिए भी अनुमान लगाया है और माना जा रहा है कि कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह समय सोने में निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
