10 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : टैक्स बचाने के साथ सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) दो लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं। दोनों योजनाओं में निवेश करने पर निश्चित रिटर्न मिलता है और आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी लिया जा सकता है। हालांकि ब्याज दर, लॉक-इन अवधि, लिक्विडिटी और रिटर्न के मामले में दोनों में कुछ अहम अंतर हैं। ऐसे में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि एफडी और NSC में से आपके लिए कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। अगर आप अपने पोर्टफोलियो के लिए बेहतर विकल्प चुनना चाहते हैं, तो एनएससी और एफडी के बीच मुख्य अंतरों को समझना जरूरी है।
सुरक्षा
एनएससी और FD दोनों ही बहुत सुरक्षित माने जाते हैं। एनएससी भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए इसमें सरकारी गारंटी होती है और यह अत्यधिक सुरक्षित है। दूसरी ओर, प्रतिष्ठित बैंकों में FD भी काफी सुरक्षित है, क्योंकि बैंक RBI के सख्त नियमों और नियामकीय ढांचे के तहत काम करते हैं।
ब्याज दर
एनएससी की ब्याज दर सरकार द्वारा तय की जाती है और निवेश अवधि के दौरान फिक्स रहती है। वर्तमान में (जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के लिए) एनएससी पर 7.7% प्रति वर्ष की ब्याज दर लागू है, जो सालाना कंपाउंड होती है और मैच्योरिटी पर मिलती है। FD में ब्याज दर बैंक और बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकती है, लेकिन एक बार FD खोलने के बाद तय दर पूरे टेन्योर के लिए फिक्स रहती है। कई बैंकों में 5 साल की FD पर 6-7.5% तक दर मिल सकती है, जबकि कुछ मामलों में NSC से ज्यादा भी मिल सकती है। सीनियर सिटीजन को दोनों में अतिरिक्त दर का लाभ मिलता है।
टैक्स लाभ
एनएससी में निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। ब्याज पर टैक्स लगता है, लेकिन कोई TDS नहीं कटता। FD का ब्याज निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है। टैक्स-सेविंग FD (5 साल की) में भी 80C के तहत 1.5 लाख तक छूट मिलती है।
लिक्विडिटी
एनएससी में 5 साल की फिक्स लॉक-इन पीरियड होती है। मैच्योरिटी से पहले निकासी आमतौर पर संभव नहीं होती (केवल विशेष मामलों जैसे मृत्यु में)। हालांकि, एनएससी को कुछ मामलों में लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। FD में ज्यादा लचीलापन है। जरूरत पड़ने पर प्रीमैच्योर विड्रॉल संभव है, लेकिन पेनल्टी लग सकती है।
निवेश अवधि
एनएससी मुख्य रूप से 5 साल की फिक्स अवधि के लिए उपलब्ध है (कुछ पुराने में 10 साल के विकल्प भी थे, लेकिन वर्तमान में 5 साल प्रमुख है)। FD में अवधि बहुत लचीली है-7 दिन से लेकर 10 साल तक के कई ऑप्शन मिलते हैं, जिससे आप अपने लक्ष्यों के अनुसार चुन सकते हैं।
कंपाउंड इंटरेस्ट
एनएससी में ब्याज सालाना कंपाउंड होता है, लेकिन इसे दोबारा निवेश नहीं किया जाता-सारा ब्याज मैच्योरिटी पर मिलता है। FD में क्यूमुलेटिव ऑप्शन चुनने पर ब्याज कंपाउंड होता है (आमतौर पर तिमाही आधार पर), जिससे कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा मिल सकता है। नॉन-क्यूमुलेटिव में ब्याज नियमित मिलता है।
सीनियर सिटीजन के लिए लाभ
दोनों में सीनियर सिटीजन को सामान्य से ज्यादा ब्याज दर मिलती है। एनएससी में भी अतिरिक्त दर लागू होती है, जबकि बैंक FD में अक्सर 0.25-0.75% अतिरिक्त मिलता है।
नॉमिनेशन सुविधा
एनएससी और FD दोनों में नॉमिनेशन की सुविधा उपलब्ध है। इससे निवेशक की मृत्यु पर राशि आसानी से नामित व्यक्ति को मिल जाती है, बिना ज्यादा कानूनी प्रक्रिया के।
कैसे करें चुनाव
आईसीआईसीआई बैंक के मुताबिक, अगर सरकारी गारंटी, फिक्स 7.7% रिटर्न, और 80C टैक्स बचत प्राथमिकता है तो आपके लिए एनएससी बेहतर रहेगा। अगर ज्यादा लचीलापन, संभावित उच्च दर (कुछ बैंकों में), और कंपाउंडिंग का फायदा चाहिए तो आपके लिए एफडी बेहतर रहेगा। हमेशा अपनी वित्तीय जरूरतों, टैक्स स्थिति और लिक्विडिटी की आवश्यकता के आधार पर फैसला लें। निवेश से पहले लेटेस्ट ब्याज दरों की जांच जरूर करें, क्योंकि ये बदल सकती हैं।
सारांश:
2026 में निवेशकों के लिए FD (Fixed Deposit) और NSC (National Savings Certificate) दोनों ही सुरक्षित विकल्प हैं, लेकिन हर निवेशक के लिए उनका महत्व अलग होता है। FD में बेहतर लिक्विडिटी मिलती है और ब्याज दर स्थिर रहती है, जबकि NSC टैक्स बचत के लिए लाभकारी है और लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकता है। निवेश से पहले ब्याज दर, टैक्स लाभ और निकासी की सुविधा को ध्यान में रखना जरूरी है।
